इंद्रधनुष - नवोदय के सात साल
स्कूल जीवन किसी का भी जिंदगी का कभी न भूलने वाला समय होता हैं और जैसे जैसे हम जीवन सफर में आगे बढ़ते हैं , वैसे वैसे वो दिन और याद आते हैं क्योंकि वह दिन बेबाक और ज़िन्दगी से पूर्ण दिन थे जहाँ स्वार्थ , चिंता , प्यार और स्नेह बहुत था। विवाद या झगडे घंटो में सुलझ जाते थे। दोस्ती स्वार्थ से परे होती थी और रिश्ते सोच समझकर नहीं बनते थे।
किताब का नाम " इंद्रधनुष " इसलिए रखा क्योंकि नवोदय में बिताये सात साल , कहीं ने कहीं इंद्रधनुष के रंगों से मेल खाते हैं। हँसी , ठिठोली , प्यार , तकरार , रूठना , मनाना , पढ़ाई की चिंता आदि सारे भावो से भरे ये रंग इंद्रधनुष के रंगों से ही तो मेल खाते थे।
अपने समय के तमाम अनुभवो को समेटने का प्रयास किया हैं इस उम्मीद के साथ की किसी को भी ठेस न पहुँचे और फिर भी अगर किसी का दिल दुःखता हैं तो क्षमापार्थी हूँ। उद्देश्य सिर्फ कुछ पल आपको जीवन की तमाम चिंताओं के बीच फिर से उसी आँगन में पहुँचा सकू जहाँ हम बेख़ौफ़ जीते थे और अपने आने वाले समय के सपने बुने थे।
तो चलिए , यादो के गलियारे में फिर से गोते लगाते हैं।
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