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Atharvaved
भारतीय साहित्य एवं संस्कृति में लंबे समय तक तीन ही वेदों की मान्यता रही थीµट्टग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद। इन तीनों वेदों में जहां यज्ञों, देवस्तुतियों, स्वर्ग प्राप्ति आदि को महत्त्व दिया गया है, वहीं चौथे अर्थात अथर्ववेद में इन के अतिरिक्त लौकिक जीवन से संबंधित औषधियों, जादू, टोनोंटोटकों का भी वर्णन है। इस रूप में अथर्ववेद की महत्ता स्वयं सिद्ध है। यज्ञों में भी अथर्ववेद को विशेष महत्त्व प्राप्त रहा है, क्योंकि यज्ञ के प्रधान ट्टत्विज के लिए अथर्ववेद का ज्ञान होना अनिवार्य है। प्रसिद्ध ‘पृथ्वी सूक्त’ अथर्ववेद का ही विशेष सूक्त है, जिस में पृथ्वी को माता कहा गया हैµफ्माता पृथिवी पुत्रे{हं पृथिव्याः।य् यह भावना शेष तीनों वेदों में नहीं मिलती।
इस महत्त्वपूर्ण वेद का सायण भ
इस महत्त्वपूर्ण वेद का सायण भ
1259 pages, Kindle Edition
Published September 13, 2017
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