डायरी के रहस्य से पर्दे उठाने के लिए जब प्राईवेट जासूस अर्जुन भारद्वाज ने कदम बढ़ाए तो रहस्य के पर्दे और बढ़ते चले गए और मंजिल पास आने के बजाय और दूर जाती नजर आई!
2.5/5 मेरे हिसाब से अपनी कमियों के साथ भी दौलत की खातिर एक पठनीय उपन्यास है जिसे एक बार पढ़ा जा सकता है। उपन्यास के विषय में मेरे विस्तृत विचार आप निम्न लिंक पर क्लिक करके जान सकते हैं : दौलत की खातिर