मेरी कविताएँ मेरी भावनाओं का दर्पण हैं। मैं अन्य सम्मानीय कवियों या लेखकों की तरह ब्याकरण का ज्ञानी नही हूँ, मैंने बस वही लिखा जो अनुभव किया है। बचपन से हरिवंश राय बच्चन, जयशंकर प्रसाद, सुभद्रा कुमारी चौहान आदि महान लेखकों को पढ़ते आया हूँ और ग़ालिब से तो काफी प्रभावित रहा हूँ। 12-13 वर्ष की उम्र में मैंने पहली कविता लिखी थी। "आती बारी जब वोटों की, दिखाते गड्डी नोटों की।" हमारे समाज की विभिन्न कुरीतियों के अलावा मैंने हास्य और प्रेम पर भी कुछ कविताएँ लिखी हैं, मुझे उम्मीद है कि इन्हें पढ़ने वाले इन्हें पसन्द करेंगे।