कोई व्यक्ति एक अच्छा चित्रकार हो सकता है; वैज्ञानिक हो सकता है; इंजीनियर और गणितज्ञ हो सकता है; पर एक ही व्यक्ति उत्कृष्ट चित्रकार; अच्छा वैज्ञानिक; श्रेष्ठ इंजीनियर; कुशल गणितज्ञ; अद्भुत चिंतक; गजब का वास्तुविद्; योजनाकार; संगीतज्ञ; वाद्ययंत्र डिजाइनर आदि सबकुछ हो— विश्वास करना कठिन है; लेकिन ऐसा ही एक अद्भुत व्यक्ति था—लियोनार्डो दा विंची। लियोनार्डो युद्ध के घोर विरोधी थे; पर विडंबना यह कि उन्हें हिंसक अस्त्र-शस्त्र; युक्तियाँ; उपकरण आदि तैयार करने पड़े। परिस्थितियाँ इतनी प्रतिकूल थीं कि उनके तमाम चित्र; मूर्तियाँ; मॉडल आदि अधूरे ही रह गए। उनके डिजाइन किए हुए शहर; नहरें; बाँध आदि कागजों पर ही चिपके रह गए। बाद के वैज्ञानिकों; कलाकारों; दार्शनिकों ने उन्हें अपना आदर्&
जन्म : 12 जनवरी, 1960 को इटावा (उ.प्र.) में। शिक्षा : विकलांग होने के बावजूद हाई स्कूल तथा इंटरमीडिएट की परीक्षाएँ प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कीं। सन् 1983 में रुड़की विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग की उपाधि प्राप्त कर सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (CEL) में सहायक अभियंता के रूप में नियुक्त हुए। विभिन्न विभागों में काम करते हुए आजकल मुख्य प्रबंधक के रूप में काम कर रहे हैं। अब तक कुल 32 पुस्तकें तथा विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लगभग 300 लेख प्रकाशित। पुरस्कार-सम्मान : सन् 1996 में राष्ट्रपति पदक, 2001 में ‘हिंदी अकादमी सम्मान’ तथा योजना आयोग द्वारा ‘कौटिल्य पुरस्कार’। सन् 2003 में अपारंपरिक ऊर्जा स्रोत मंत्रालय द्वारा ‘प्राकृतिक ऊर्जा पुरस्कार’, 2004 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा ‘सृजनात्मक लेखन पुरस्कार’, विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा ‘डॉ. मेघनाद साहा पुरस्कार’ तथा महासागर विकास मंत्रालय द्वारा ‘हिंदी लेखन पुरस्कार’।
"लियोनार्दो द विंची" एक बहुचर्चित नाम, लेकिन हम उनके बारे में कितना जानते हैं? मेरी तरह ही अधिकांश लोग लियोनार्दो के बारे में इतना ही जानते हैं कि उन्होंने एक विश्व प्रसिद्ध पेंटिंग "मोनालिसा" बनाई है।
लेकिन ये विनोद कुमार मिश्र द्वारा लियोनार्दो की जीवानी पढ़ने के बाद पता चलता है कि लियोनार्दो एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी एक अद्भुत व्यक्ति थे। वह चित्रकार के साथ मूर्तिकार, वैज्ञानिक, यांत्रिक, गणितज्ञ, आर्किटेक्ट, दार्शनिक भी थे। जो सुनने में एक काल्पनिक व्यक्ति की भांति लगता है लेकिन लियोनार्दो नें अपने जीवनकाल में हर क्षण इन तमाम क्षेत्रों में अपना योगदान देने में ही व्यतीत किया।
युद्ध का विरोधी होने के बावजूद उन्हें राजा के आज्ञा अनुसार काफ़ी सारे युद्ध उपकरण इजाद करने पड़े। लियोनार्दो नें कई वैज्ञानिक उपकारणों की कल्पना की, विचार का एक बीज बोया जो आगे चलकर अथक प्रयासों के बाद हकीकत में बन पाया। टेबल लैंप से लेकर, आराम कुर्सी व पन्नडूब्बी तक के आइडिया इनके नोट्स में मिले।
इनके लिखे नोट्स इस कदर बिखेर की कई वर्षों-वर्षो तक इनके वैज्ञानिक प्रयासों का असल रूप आम जनमानस तक नहीं पंहुँच पाया। नोट्स के कुछ हिस्से, इटली के पास, कुछ फ़्रांस और कुछ इंग्लैंड के बाद.. और न जाने कितना हिस्सा कबाड़ी में खो गया। कुछ वर्षों पूर्व इनका एक नोट्स माइक्रोसॉफ्ट के मालिक बिल गेट्स नें करोङो में खरीदा, वो भी कम्प्यूटर पे लियोनार्दो के प्रयास का शोध करने के लिए।
किताब विश्व प्रसिद्ध पेंटिंग मोनालिसा के बारे में भी जानकारी देती है। उस जामने में मोनालिसा की पेंटिंग आकर्षक होने के साथ क्रन्तिकारी भी थी। क्रन्तिकारी इसलिए कि उस समय गंभीर मुद्रा में ही पेंटिंग बनाई जाती थी, और मोनालिसा की हल्की मुस्कान इस क्षेत्र में एक क्रांति ले के आई। लेकिन मोनालिसा थी कौन? कुछ लोग कहते की वह राजा की पत्नी है, कुछ कहते की वह लियोनार्दो की प्रेमिका है तो कुछ कहते कि नकली बाल लगाए वह लियोनार्दो ही है।
बात इस पर भी हुई कि कैसे लियोनार्दो की अन्य पेंटिंग जो मशहूर हैं, वे कैसे बनी और कँहा हैं.. और पेंटिंगो में समयानुसार बदलाव कैसे होते रहे। जैसे ओरिजिनल पेंटिंग में मोनालिसा अपने खिड़की पर बैठी है और उसके दोनों तरफ खिड़कियों के खम्भे हैं जो मौजूदा पेंटिंग में देखने को नहीं मिलते क्योंकि वह पेंटिंग साइड से काटकर छोटी कर दी गई।
बहरहाल इस पुस्तक को लेखक नें बड़े ही रोचकता से संजोया है। लेखक नें लियोनार्दो के जन्म से उसकी मृत्यु और उनके कार्यों का वर्णन इस तरीके से किया है कि पाठक उसमें रमता जाएगा।
i didnt want a long book, just wanted to have an idea about Leo the great so intentionally opted for a hindi book, it served my purpose well.
what an extra ordinary man This Leo was, no doubt he is considered as universal Genius. a handful of people in history can be considered as universal genius. he was so so far ahead of his time.