इस बार आंसु ने पलकों को भिगो दिया, विजय के हाथ से परवीन का खत भी छुट गया। अफरोज की मौत के दर्द का आंसु विजय की आंख से निकल कर परवीन के गाल पर जा गिरा। सच कहु जिंदगी एक सफर है, और मौत एक लम्हा, वो भी खुबसूरत लम्हा, और हम इस लम्हे को अपनी गलती से बदसूरत बना देते है। हम मौत के ऐसे मूकाम पर आ रुकते है, जहां आत्मा शरीर से निकल कर कुछ पलों के लिए चीख चीख कर बिलखते हुए रोती है, वो जाना नहीं चाहती, मगर हम उसे जबरन ही निकाल फेंकते है।