समाज के निचले तबके का, मामूली सी सरकारी नौकरी करने वाला एक आदमी अगर डायरी लिखता होगा तो उसकी डायरी में क्या होगा? वही रोज़मर्रा की तमाम बातें, छोटे बड़े रोटी कपड़ा मकान के संघर्षों के सिलसिले। नौकर की कमीज एक ऐसे ही व्यक्ति, संतू बाबू की डायरी है जो एक सरकारी दफ़्तर में बाबू है। इस दफ़्तर से लेकर संतू के चारों ओर तक समाज के विभिन्न वर्गों की ऊंची नीची सीढ़ियां हैं। संतू अपनी तंग ज़िन्दगी जीने में, निचली सतह से इन सारी सीढ़ियों को देखता है। वो सब कुछ देखता है जो रोज़ उसके इर्द गिर्द घटित होता है, इसके साथ साथ वो और भी बहुत सी विडंबनाएं देखता है जो शायद दूसरे लोग देखते हों या न भी देखते हों। नौकर की कमीज़ इस निहायत ही साधारण व्यक्ति और उसके जीवन की एक निहायत ही साधारण कहानी है। लेकिन इसी साधारण कहानी में जीवन की सबसे कठिन गूढ़ता भी है।
इस कहानी में लगभग वो सभी पात्र हैं जो एक पूरे मध्यम वर्ग के समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। संतू की बीवी जो एक बहुत साधारण, भोली औरत है, उसका जीवन, किराये के मकान की छतों से टपकते पानी को इकठ्ठा करने, एक संदूक में अपनी ज़रूरत की चीज़ों के साथ कुछ रूपये बचाकर रखने, चौके की साड़ी को आने जाने की साड़ी से अलग रखने तक ही सीमित है। उसकी ये सीमित दुनिया भी अपने आप में बहुत सुन्दर, सुखदायी और भरपूर है। संतू के अपने मोहल्ले में कुछ दोस्त हैं, दफ़्तर में कुछ सहकर्मीं और साहब हैं। आस पास कुछ नौकर भी हैं जो उसके नहीं हैं। या फ़िर वो कुछ हद तक ख़ुद भी थोड़ा थोड़ा कई लोगों का नौकर है?
इस किताब की ख़ासियत संतू और उसके आस पास के पात्रों के निजी संसार में पाठकों को मिलने वाले प्रवेश में है। कभी ये पात्र दफ़्तर से घर जाने के रास्ते में, नुक्कड़ का मूंगफली वाला तो कभी दफ़्तर के बड़े साहब हैं। विनोद कुमार शुक्ल, संतू के मन को इतनी भली भांति पहचानते हैं कि उसमें उसके जीवन के छोटे दायरों में सीमित रहते हुए भी, आने वाले विचारों, अटपटी कल्पनाओं और हर सूक्ष्म और वृहद् सवालों को उन्होंने हूबहू इस किताब में उतार कर रख दिया है। ये सरल और कठिन विचार, कल्पनाएं, अनवरत प्रश्न कभी कभी बहुत अजीब लग सकते हैं लेकिन इनकी वास्तविकता से दूरी बहुत कम है।
अगर आप भी मेरी तरह एक छोटे कस्बे या नगर से ताल्लुक रखते हैं और आपका भी बचपन या जीवन का कोई भी हिस्सा सरकारी नौकरी करने वाले परिवार के सदस्य के साथ गुज़रा है तो ये किताब अलग अलग स्तरों में आपको अपनी ही कहानी लगेगी जो आपको हंसाएगी, कभी कठिन लगेगी तो कभी विचलित कर देगी।