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केदारनाथ सिंह की कविताओं का संसार करीब-करीब समूचा भारतीय संसार है-वह इस अर्थ में कि उन्हें उन तमाम स्रोतों का पता है जहाँ से जीवन मिलता है-भले ही आज की सर्वव्यापी मानव-विरोधी मुहीम में वह जीवन कुछ कम हो चला हो और कभी-कभी उसके लुप्त हो जाने का भी खतरा हो-और केदारनाथ सिंह की इस आस्था को उनसे छीन लेना असम्भव है कि मानवीय अस्तित्व को-आज के भारत में आदमी बनकर रहने की इच्छा को, अर्थ तथा बल देने के लिए उन्ही स्रोतों पर पहुंचना होगा और जिस जमीन से वे निकल रहे हैं, उसे ही और गहरा खोदना होगा ! इस प्रक्रिया में केदारनाथ सिंह की भाषा और नम्य और पारदर्शक हुई है और उसमे एक नै ऋजुता और बेलौसी दिखायी पड़ती है ! - विष्णु खरे जीवन तो हर अच्छे कवि की कविताओं में होता है ! लेकिन जीवन की स्थापना बहुत कम कवि कर पाते हैं ! टूटा हुआ ट्रक भी पूरी तरह निराश नहीं है ! बिलकुल मशीनी चीज टूटने के बाद भी यात्रा पर चल देने को तैयार है ! वनस्पति इसकी मरम्मत कर रही है जो क्षुद्र है, नष्टप्राय है उसे देखकर भी केदारजी को लगता है कि जीवन रहेगा, पृथ्वी रहेगी-"सिर्फ इस धुल का लगातार उड़ना है जो मेरे यकीन को अब भी बचाये हुए है-नमक में, और पानी में और पृथ्वी के भविष्य में ! " जो नष्ट हो जाता है वह कितना ही क्षुद्र क्यों न हो, उन्हें दुखी करता है (कीड़े की मृत्यु) ! जीवन के प्रति यह सम्मान ही केदारजी के इस संग्रह की मुख्य अंतर्वस्तु है ! - अरुण कमल
88 pages, Hardcover
Published January 1, 1999
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Community Reviews
Displaying 1 - 2 of 2 reviews
December 9, 2020
You know that feeling you get upon finishing a breathtaking novel? Whereupon you sometimes hug the book for what it made you feel? How beautiful it was? That was me after reading EACH poem. Need to devour so much more of Kedarnath Singh. What a heartwarming venture into Hindi poetry. Looking forward for more.
March 20, 2018
केदारनाथ सिंह
इंतजार मत करो
जो कहना है कह डालो
क्योंकि हो सकता है फिर कहने का कोई अर्थ ना रह जाए।
इंतजार मत करो
जो कहना है कह डालो
क्योंकि हो सकता है फिर कहने का कोई अर्थ ना रह जाए।
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