इस किताब के द्वारा यह कोशिश की गयी है कि हम सब यह जान पायें कि नवरात्रि क्यों मनाते हैं और माँ अपने इन नौ रूपों द्वारा कैसे हम सब को नौ चक्रों से अवगत कराती हैं| माँ का हर रूप एक दूसरे से एक दम अलग है, किसी में दो हाथ हैं, किसी में चार हाथ हैं, किसी में आठ हाथ तो किसी में दस हाथ हैं, और वह भी एकदम अलग - अलग मुद्रा में, विभिन्न प्रकार की चीज़ें पकड़े जैसे ,कमल का फूल, ब्रह्म ज्योति ,रुद्राक्ष की माला, अमृत का कलश, शंख ,जल से भरा कमंडल | तरह-तरह के अस्त्र शस्त्र जैसे तीर, धनुष, त्रिशूल, गदा, तलवार, सुदर्शन चक्र एवं खड्ग | कहीं वह नंगे पाँव जमीन पर खड़ी हैं तो कहीं पर भिन्न -भिन्न प्रकार की सवारियों पर बैठी हैं जैसे बैल , शेर ,चीते , और कहीं तेज़ रफ्तार में भागते हुए गधे पर सवार हैं, वह भी एकदम काले रंग व बिखरे बाल में यानी बï