Jump to ratings and reviews
Rate this book

Vidhava

Rate this book
क्षिप्रा नदी का पूल पार कर ही रहें थे कि, जोरदार गर्जना के साथ दो मेघो का सुमधुर मिलन हुआ, और डर कर मेघा, मोन्टु से चिपक गई। मेघो की गर्जना ने मेघा की धड़कनों को बड़ा दिया जिसे मोन्टु स्पष्ट महसुस कर रहा था। मोन्टु ने कहा.. डर लग रहा हो तो कही रुक जायें..... जवाब था नहीं.....। और इसी जवाब के साथ मेघो ने प्रेमबूंदों की बारिश शुरु कर दी। वो जो छोटी बदली थी ना.... वो भी अपनी बूंदो से, दोनों को भिगोने के लिए आ गई। जैसे जैसे बादल की बूंदे दोनों को भिगो रही थी वैसे-वैसे मुहब्बत का बीज आकार ले रहा था, उसमें कुछ नया निर्माण हो रहा था। बादलों की ठंड़ी बूंदो में दोनों लगातार भीगते-भीगते घर पहुंचे। मेघा ने रोकने की कोशिश की मगर मोन्टु नहीं रुका, वह अपने घर आ गया। बदन भीगा हुआ था मगर ठंड नहीं लग रही थी, सिर पोछते पोछते भी कभी &#

14 pages, Kindle Edition

Published January 24, 2018

Loading...
Loading...

About the author

Rinkesh Bairagi

45 books1 follower

Ratings & Reviews

What do you think?
Rate this book

Friends & Following

Create a free account to discover what your friends think of this book!

Community Reviews

5 stars
2 (22%)
4 stars
1 (11%)
3 stars
0 (0%)
2 stars
3 (33%)
1 star
3 (33%)
Displaying 1 of 1 review
Displaying 1 of 1 review