क्षिप्रा नदी का पूल पार कर ही रहें थे कि, जोरदार गर्जना के साथ दो मेघो का सुमधुर मिलन हुआ, और डर कर मेघा, मोन्टु से चिपक गई। मेघो की गर्जना ने मेघा की धड़कनों को बड़ा दिया जिसे मोन्टु स्पष्ट महसुस कर रहा था। मोन्टु ने कहा.. डर लग रहा हो तो कही रुक जायें..... जवाब था नहीं.....। और इसी जवाब के साथ मेघो ने प्रेमबूंदों की बारिश शुरु कर दी। वो जो छोटी बदली थी ना.... वो भी अपनी बूंदो से, दोनों को भिगोने के लिए आ गई। जैसे जैसे बादल की बूंदे दोनों को भिगो रही थी वैसे-वैसे मुहब्बत का बीज आकार ले रहा था, उसमें कुछ नया निर्माण हो रहा था। बादलों की ठंड़ी बूंदो में दोनों लगातार भीगते-भीगते घर पहुंचे। मेघा ने रोकने की कोशिश की मगर मोन्टु नहीं रुका, वह अपने घर आ गया। बदन भीगा हुआ था मगर ठंड नहीं लग रही थी, सिर पोछते पोछते भी कभी &#