रोमांस फिक्शन 'जस्ट लाइक दैट' के लेखक मिथिलेश गुप्ता की पेशकश इस वैलेंटाइन पर Book ये जो यादें होती है न, जो रात में न सोने देती है न कुछ काम करने देती है। जी हाँ... मैं उन्हीं यादों की बात कर रहा हूँ। वो 'इश्क वाली यादें!' कभी तो दिल सोचता है आखिर क्यों वो जिंदगी में आया, वहीँ किसी का दिल सोचता है, आखिर क्यों अब तक वो जिंदगी में नहीं आया! ये 'वो ' जिसकी मैं बात कर रहा हूँ, ये 'इश्क वाली बात' है!' जितनी आसानी से लोग एक दूसरे को भूल जाने की बात कर जाते हैं, उस 'इश्क' को भूलना उतना भी आसान नहीं होता! क्योंकि ये उन इश्क वाली यादों की खुशबूं हैं, जिन्हें हम भूलकर भी भूल नहीं पातें, और युहीं 'इश्क' वाले कितने किस्से कहीं गुम हो जाते हैं ! 'इसलिए...अक्सर इश्क वाली बातें बस ये सोचकर लिख लेता हूँ, कि कहीं वो बाते यूँ हीं गुम न हो ज