डॉ. राहत इन्दौरी उर्दू के विश्वविख्यात शायर हैं। उनका जन्म इंदौर में स्वर्गीय रिफतुल्लाह कुरैशी एवं स्वर्गीया मकबूल बी के घर में 1 जनवरी 1950 को हुआ। राहत साहब ने आरंभिक शिक्षा इन्दौर के नूतन स्कूल से तथा उर्दू में एम.ए. और पी.एच.डी. इन्दौर विश्वविद्यालय से हासिल की। तत्पश्चात 16 वर्षों तक इन्दौर विश्वविद्यालय में उर्दू साहित्य का अध्यापन किया। उसके बाद मुशायरों और कवि सम्मेलनों में शिरकत का जो सिलसिला शुरू हुआ वो आज तक निरंतर जारी है। पिछले 40 वर्षों में राहत साहब भारत भर के सभी प्रमुख शहरों, गाँवों, कस्बों के अलावा- अमरीका, कनाडा, जर्मनी, इंग्लैंड, सिंगापुर, पाकिस्तान, कतर, ओमान, बहरीन, सऊदी अरब, यू.ए.ई जैसे देशों के मुशायरों में शिरकत कर चुके हैं। डॉ. राहत इन्दौरी को देश दुनिया के अनेक पुरस्कारों और सम्मानों से नवाज़ा जा चुका है। उन्हें प्राप्त कुछ प्रमुख पुरस्कारों में राजीव गांधी लिटरेरी एवार्ड, मौलाना मोहम्मद अली जौहर एवार्ड, मध्य प्रदेश रत्न और मिर्जा गालिब एवार्ड शामिल हैं। उर्दू लिपि में प्रकाशित उनकी प्रमुख पुस्तकें धूप-धूप, पाँचवा दरवेश, नाराज़ और कलाम हैं। इसके अतिरिक्त देवनागरी लिपि में प्रकाशित उनकी प्रमुख पुस्तकें मेरे बाद, चाँद पागल है, मौजूद और नाराज़ हैं। राहत साहब ने अनेक हिन्दी फिल्मों में कई मशहूर गीत रचे और लगभग सभी प्रमुख गज़ल गायकों ने उनकी ग़ज़लों को अपनी आवाज दी है। इनमें कुछ प्रमुख फिल्में- सर, खुद्दार, जानम, नाराज़, नाजायज़, औज़ार, आरजू याराना, करीब, मिशन कश्मीर, घातक, मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी, मुन्ना भाई MBBS, इश्क, मर्डर, मीनाक्षी आदि हैं। डॉ. राहत इन्दौरी एक ऐसे शायर हैं जिनकी शायरी और शख्सियत के करोड़ों प्रशंसक भारत में ही नहीं वरन् पूरी दुनिया में मौजूद हैं। -डॉ. प्रवीण शुक्ल