मैं "अपरिचिता - एक अविस्मरणीय स्मृति" को समर्पित करता हूँ अपने जीवन के उन चार स्तंभों को जिन्होंने मेरे अन्दर की काव्यात्मक रचना को प्रेरित किया - मेरी माता-पिता जिन्होंने मेरे जीवन में प्रेम शब्द को परिभाषित किया, मेरी हिंदी की शिक्षिकाएं श्रीमती चन्द्र कांता मोहिन्द्रा, स्वर्गीय श्रीमती सम्पदा पलटा जिन्होंने मेरी हिंदी को सशक्त बनाया और मेरा विद्यालय केंद्रीय-विद्यालय सेक्टर-३१ डी चंडीगढ़ जिसमे अपने जीवन के सुनहरे और अविस्मरणीय पल बिताये...