Jump to ratings and reviews
Rate this book

प्रतिज्ञा

Rate this book
‘अरे ब्वारी, क्या हुआ वीरू को?’ लरजता स्वर, भीगी हुई आँखें, कँपकँपाता शरीर।
‘कुछ नहीं बताते, माँजी।’ सुनीता ने आगे बढ़ थाम लिया उन्हें।
‘अरे, क्यों नहीं बताता? किसने किया तेरा ये हाल?’ और फिर साथ आए युवकों को भी ले लिया आड़े हाथ।
‘िकससे दुश्मनी है मेरे वीरू की? यह तो सबका भला ही कर रहा है।’
सब खामोश थे। जानते थे, किससे दुश्मनी है वीरू की। किसके आँख की किरकिरी बन गया है वीरू। लेकिन उसकी पत्नी और माँ कहीं घबरा न जाएँ, इसलिए चुप रहे।
‘कहीं उन शराबवाले गुंडों ने तो मारपीट नहीं की?’ आशंकित भगुली देवी ने साथ आए युवक से पूछा।
‘सुरू, तू बता। ये तो बताएगा नहीं। वही थे न? कितनी बार कहा इससे, मत ले उन लोगों से दुश्मनी।’ उसने झट दूसरे साथी से सवाल किया।
एक महिला का अपने ऊपर हो रहे अत्याचार-अनाचार के व

140 pages, Kindle Edition

Published January 11, 2016

Loading...
Loading...

About the author

Ramesh Pokhriyal 'Nishank'

78 books6 followers

Ratings & Reviews

What do you think?
Rate this book

Friends & Following

Create a free account to discover what your friends think of this book!

Community Reviews

5 stars
11 (45%)
4 stars
5 (20%)
3 stars
5 (20%)
2 stars
2 (8%)
1 star
1 (4%)
Displaying 1 - 1 of 1 review
Displaying 1 - 1 of 1 review