हिन्दी कहानियों से जुड़ाव मुझे इस पुस्तक की ओर खींच लायी। हरी मुस्कुराहटों वाला कोलाज, गौतम राजऋषि द्वारा रचित लघु कथाओं का संग्रह है जो मुखयत एक सैनिक के जीवन के अनेक रूपों के इर्द गिर्द घुमती है। इस संग्रह में कुल २१ लघु कहानियाँ हैं जो 'हीरो ' से प्रारंभ होक 'हरी मुस्कुराहटों वाला कोलाज पे' खतम होती है।
ये कहानी एक सैनिक के जीवन में घुले अनेकों प्रकार के रंगो का बयान करती है। लेखक ने अपनी बात को बड़ी ही सरलता और स्पस्ट भाषा में पाठकों के सामने प्रस्तुत क्या है। कहानियों में सौंदर्य, अनुराग, साहस , समर्पण का भाव दीखता है सैनिको द्वारा। और प्रारंभ के ही कुछ शब्दो में लेखक ने अपने मन की भी जिज्ञासा सामने राखी है की सैनिको को अपने घर लौटने पे एक अलग सी ही अनुभूति प्रदान होती है अपने के बिच आके , छोटे बच्चों के बिच बैठ के स्वयं भी बालक बन जाना और सबको कहानियों सुनाने लगना।
एक बात से मै लेखक के साथ मत नहीं रखता हूँ की कोई ईसाई समुदाय का व्यक्ति अधिकांस्तां अशुद्ध हिंदी बोलते हुए ही क्यों दिखाया जाता है। ये परम्परा तो भारतीये सिनेमा जगत से ही चली आ रहा है।
कुल मिलाकर देखा जाये तो ये पुस्तक अतयंत सुन्दर है और प्रेरित करती है हमे इनके किरदारों से कुछ सिखने के लिए। कभी हीरो बन के भय को जीत लेना तो कभी दानी बन के अपनी सीट पे किसी और को भी बैठा लेना। ये पुस्तक काफी प्रेरणादायक है और अपनी और बहुत सरे पाठको को आकर्षित करेगी।