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हितोपदेश की कहानियाँ भारतीय परिवेश को ध्यान में रखकर लिखी गई उपदेशात्मक कथाएँ हैं, जिसके रचनाकार नारायण पंडित हैं। हितोपदेश की कथाएँ अत्यंत सरल, रोचक, प्रेरक और सुग्राह्य हैं। विभिन्न पशु-पक्षियों पर आधारित तार्किक कहानियाँ इसकी खास विशेषता है, जिनकी समाप्ति किसी शिक्षाप्रद बात से होती है।इस पुस्तक में हितोपदेश की मूल लोकप्रिय कहानियों को स्थान दिया गया है। कहानियों को रोचक और पठनीय बनाने के लिए इनके मूल शीर्षक, क्रम, कथानक और विस्तार को यथोचित संपादित कर दिया गया है, लेकिन कथा की मूल भावना को जीवंत रखा गया है, जिससे पाठक पारंपरिक आस्वादन पाने से वंचित न हों।अपनी रचना के कई सौ साल बाद भी इन कथाओं की लोकप
हितोपदेश की कहानियाँ.... परम्परिक प्रेणादायी, सिख.. बुक में 14 कहानिया हैं 1 देने की आदत एक दिन भिखारी से राजा ने उलट भीख मांग लिया,राजा को दो दाने जौ के दिए, जो बाद में सोने के बन गए, जिससे उसे दान न करने की आदत पर पछतावा हुआ। 2. सही कीमत: बेटे ने मनुष्य की कीमत पूछी, पिता ने अपने बेटे को लोहे के सरिये का उदाहरण देकर कहा की लोहे की कीमत कील बनाने से बढ़ेगी, घड़ी का स्प्रिंग बनाने से और बढ़ेगी, असल में कीमत बनने में हैं. 3.मन में झाँको: पैसे में खुशी ढूंढ़ रहा सेठ को एक ऋषि ने अँधेरे आश्रम में खोई अँगूठी को बाहर उजाले में ढूँढ़कर सेठ को यह समझाया कि खुशी बाहर नहीं, बल्कि अपने मन के भीतर ढूँढ़नी चाहिए। 4. सेवाभक्ति: मनोहर के माता पीतह की सेवा से खुश हो कर भगवान दर्शन को,बुलाने पर भी दरवाजा नहीं खोला क्योंकि वह अपनी माँ की सेवा कर रहा था. 5.शुभचिंतक: राजा के शुभ चिंतक बनकर खूब लोग आते थे,अपनी बीमारी का झूठा बहाना बनाकर और खून की माँग करके झूठे सुभचितको की पहचान की, क्यूंकि अगले दिन से दरबार में सबका आना बंदहो गया था. ऋण: एक वृद्ध व्यक्ति फल न मिल पाने की उम्र में भी अखरोट का पौधा लगा रहा था, राजा ने देख पूछा था तो उसने बताया की उसके पूर्वज पौधे लगा के गए जिनका फल उसने खाया, अब वह ऋण उतार रहा था. 6.यकीन: एक आदमी हैरानी जताता हैं की हाथी पतले राशियों में बंधे होने के कारण भी उसे नहीं तोड़ पा रहे थे तब रखावाले ने बतया की हाथियों ने अपनी शक्ति के बावजूद छोटी रस्सियाँ नहीं तोड़ीं क्योंकि बचपन की नाकाम कोशिशों के कारण उन्हें यकीन हो गया था कि वे उन्हें नहीं तोड़ सकते। 7.परोपकार: सोने लोहे के कणो में बातचीत में लोहे का कान दुख व्यक्त करता हैं उसके अपने उसे चोट पहुंचते हैं सोने ने समझाया कि हथौड़े की चोट सहना बुरा नहीं है क्योंकि यह हमें दूसरों के काम आने लायक सुंदर आकार देता है। जिसे वे किसी के काम आते थे, लोहे को खुश होना चाहिए की उसका भविषय उसके अपने बना रहे थे 8.दोस्ती का फर्ज: एक बाघ के बच्चे ने अपनी माँ को मारकर गाय के बछड़े से अपनी दोस्ती निभाई क्योंकि उस बाघिन ने बछड़े की माँ को मार दिया था। 9.गलत संगत: सेठ का लड़का गलत संगत में था तब एक सड़े हुए सेब को रख अलमारी में रखे बाकी सभी अच्छे सेबों को भी खराब कर दिया, जिससे सेठ के बेटे को बुरी संगत का असर समझ आया। 10.स्वाधीन: कुत्ते बाघ की मुलाक़ात होती हैं,कुते गले की जंजीर देखकर बाघ ने भरपेट भोजन का लालच छोड़ दिया और स्वतंत्र रहकर भूखा रहना बेहतर समझा। 11.दूध-पानी: एक बंदर ने लालची ग्वाले के वह पैसे नदी में फेंक दिए जो उसने दूध में पानी मिलाकर कमाए थे 12.मुसीबत में दोस्त: एक हाथी बन्दर, खरगोश, मेंढक, गीदड़ सबसे दोस्ती करने की कोसिस करा हैं पर सब उसके आकर से इंकार कार देता हैं जिस हाथी को सबने अपनी दोस्ती के लायक नहीं समझा था, उसी ने शेर को भगाकर जंगल के सभी जानवरों की जान बचाई। 13. तिरस्कार: एक दयालु सेठ ने एक बूढ़े अतिथि को सिर्फ इसलिए घर से निकाल दिया क्योंकि वह अलग धर्म का था, उसके ईश्वर को नहीं मानता था,जिस पर ईश्वर ने आकाशवाणी से सेठ को फटकार लगाई। 14.मेढक से सीख: जंगल के सभी खरगोश खुद को कमजोर मान कार एक साथ मरने का फैसला लिया था, तालाब के किनारे डूब मरने को पहुंचे तो जब मेढकों को खुद से डरकर भागते देखा, तो उन्हें अहसास हुआ कि वे दुनिया में सबसे कमजोर नहीं हैं और उन्होंने जीने का फैसला किया। 15. दो तोते: शिकारी द्वारा पकड़े गए दो तोते अलग-अलग जगह बिके,एक पंडित के घर बिका एक चोर के पास,जब राजा गुजरा तो मौका पाकर लूटने की बात करता तो दूसरा सत्कार की,अपनी संगत के हिसाब से अलग-अलग भाषा बोलने लगे थे.
Page numbers are not correct. Not even 20 stories. Max 30 pages i guess but total page count shows 300 or 400 something. Stories are not good and very dumb story collection.