मेरी बात को समझो। मैं...।“ मैं समझ रहा हूं।“ देवराज चौहान ने भिंचे दांतों से एक-एक शब्द चबाकर कहा---”लेकिन तुम यह नहीं समझ रहे कि इस दौलत का बंटवारा तुम्हारे साथ नहीं होगा। देवराज चौहान को पुलिस वालों के साथ लूट की दौलत का बंटवारा करने की आदत नहीं है। इस समय तुम्हें अपनी जान की भीख मांगनी चाहिए थी, लेकिन तुम तो दौलत में से अपना हिस्सा मांगने पर आमादा हो। दौलत को अपने साथ भगवान के घर ले जाओगे क्या या पीछे रोने वाली बीवी को देकर जाओगे!