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Vishudh Manusmriti

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पुस्तक का नाम – मनुस्मृति प्राचीन भारतीय साहित्य की यह एक प्रमाणिक ऐतिहासिक सच्चाई कि उसमें समय-समय पर प्रक्षेप होते रहे हैं, जो कि मनुस्मृति में भी हुए हैं. महर्षि दयानन्द ने सर्वप्रथम यह सुस्पष्ट घोषणा की थी कि मनुस्मृति में अनेक प्रक्षेप हुए किये गए हैं. इसीलिए उन्होंने प्रक्षेपरहित मनुस्मृति को ही प्रमाण माना है.| इस संस्करण की यही विशेषता है कि लेखक ने मौलिक और प्रक्षिप्त श्लोकों को पहचान कर केवल मौलिक श्लोकों को प्रस्तुत किया है. आशा है पाठक इसका लाभ उठायेंगे.| पुस्तक का नाम – अभ्यास और वैराग्य मानव जीवन की इष्टसिद्धि के लिए दो उपाय हैं ज्ञान और प्रयत्न। इन दोनों की पराकाष्ठा ही वैराग्य और अभ्यास है। योगदर्शन के व्यासभाष्य में वैराग्य की व्याख्या करते हुए कहा गया है ज्ञानस्यैव पराकाष्ठा वैराग्यं, तच्च ज्ञानप्रसादमान्नम्। प्रस्तुत छोटी सी पुस्तक में इन दोनों विषयों के संबंध में गहरी सटीक और संक्षिप्त किन्तु पूर्ण व्याख्या की गयी है जो जिज्ञासुजनों के लिए लाभकारी है।

664 pages, Hardcover

First published January 1, 2017

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