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मृदुला सिन्हा की लोकप्रिय कहानियाँ

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मिलनेवाला प्रत्येक व्यक्ति व परिवार, जीवंत होनेवाली सारी परिस्थितियाँ और सामने से गुजरने वाले सभी प्राकृतिक दृश्य साहित्यकार की लेखनी से निःसृत होने के लिए अकुलाते रहते हैं। लेखक के मानस स्थित कथानकों और लेखनी में प्रतियोगिताएँ चलती ही रहती हैं। ‘पहले मैं’ तो ‘पहले मैं’ की स्थिति में सभी कथानक। मानस कितने कथानकों को सहेजता है, लेखनी कितनों को कागज पर उतारती है। लगभग चालीस दशकों से देश-विदेश के सघन दौरों के दौरान सहस्रों से मिलना हुआ। देश के चप्पे-चप्पे और व्यक्तियों में साहित्य के विषय बनने की ऊर्जा है। सुदूर सूखी नदी किनारे बसा एक गाँव, नदी के साथ बिसूर रहा है तो छलछल बहती नदियों और उफनते समुद्र के किनारे बसे सहस्र गाँव अपनी जीवंतता की कहानी कह गए। कहीं फसलों से लहलहाते खेत,

190 pages, Kindle Edition

Published December 18, 2017

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Mridula Sinha

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