सनातनी की विशेषताए : एक सनातनी को चरित्रवान, पवित्र, कर्तव्य परायण, मजबूत, आत्म निर्भर, ईमानदार, न्यायपरायण, सज्जन और संतुलित चित्त का होना चाहिए, जो एक अच्छा इन्सान और अच्छा नागरिक हो | आत्मा से ही आत्मा में संतुष्ट रहने वाला, अपने अंतर्मन में विचरण करने वाला और अपनी मस्ती में मस्त रहते हुए भगवान् का ध्यान करने वाला स्थितप्रज्ञ होता है | प्राणायाम से सांसो (प्राणवायु) को संतुलित करके चित्त की एकाग्रता को पाया जाता है, इसे ही सत चित्त आनंद कहा गया है | अंतर्मन की यात्रा अर्थात अपने आप में रहने की कला को ध्यान कहा गया है