सूचना देने का काम मीडिया करती है, पर पत्रकार सूचना देने के पहले और बाद के हालात पर पैनी नज़र रखता है. ब्रजेश राजपूत जब अपनी ही रिपोर्टिंग पर अपनी रिपोर्ताज फ़ाइल करें और उसे किताब की शकल देकर आपके सामने रखें, तो मान लीजिए कि प्रयास उम्दा है I जो पत्रकार बनना चाहते हैं उन्हें यह पुस्तक ज़रूर पढ़नी चाहिए I - पुण्य प्रसून वाजपेयी एबीपी न्यूज़
टेलिविजन पत्रकारिता, जिसमें कैमरा, माइक, विज़ुअल, बाईट और पीटीसी को जोड़कर कैमरामैन और ड्राइवर की मदद से स्टोरीज तैयार होती हैं - ऐसी रिपोर्टिंग की चुनौतियाँ आज की तेज़ रफ़्तार ज़िन्दगी में लगातार बड़ी हो रही हैं I बृजेश राजपूत के इन 75 लेखों के संकलन में आप तरह-तरह की घटनाओं को केवल पढ़ ही नहीं रहे, बल्की उस घटना को रिपोर्टर की भांति देख और सुन भी रहे हैं I ऑफ द स्क्रीन, टीवी के पर्दे पर चलने वाली स्टोरी के पीछे घंटों की मारामारी, उसके पीछे के रोमांच और कवरेज की चुनौतियों वाली कहानी है I
It's practice of journalism and experiences of one of the top person in his field. It's a revelation yet entertaining. Must read for all those yearning to be a journalist especially in India.