वसीम बरेलवी की रचनायें खास व आम दोनों ही तरह के लोगों की ज़बान पर रहते हैं I इनकी इन्हीं रचनाओं का संकलन है चराग I आसान और आम फ़हम ज़बान का इस्तेमाल कर वसीम की शायरी सभी का दिल जीत लेती है I चराग में वसीम बरेलवी अपना जुड़ाव इस युग, माहौल और मिट्टी से भरपूर दर्शाते हैं I वह सिर्फ़ काल्पनिक दुनिया की बातें नहीं करते बल्कि अपने आस-पास से पूरी तरह बाख़बर रहते हैं और जदीद मौजूआत, अर्थात समकालीन समस्याओं और घटनाओं पर पूरी नज़र रखते हुए इन्हें अपनी शायरी का हिस्सा बनाते हैं I
A beautiful book. Excellent nazms, heart touching shers, so deep connect and wonderfully articulated. Simple and lucid language . A must read for all poetry lovers
वसीम साहब की कलम में शब्दों का बेहद रचनात्मक प्रयोग दिखता है| एक तरफ़ उर्दू की नजा़कत, दूसरी ओर हिन्दी की संगीनता और वहीँ साथ में खड़ी बोली का नटखट अंदाज़... उनकी रचनाओं की विविधता प्रशंसनीय है | भावनाओं के असमान का हर तारा उनकी कलम में टिमटिमाता दिखता है |
इश्क़ उनकी रूह में समाया है, सीने में दर्द भी समेटे हुए हैं, पंक्तियों में उदासीनता भी झलकेगी, मगर लहजे में तीखापन लपेटे हुए हैं...
नए ज़माने के पुराने शायर, ज़िंदादिल औ' सयाने शायर... जिंदगी की ढलती शाम में भी, ' वसीम' इश्क़ के दीवाने शायर...
मेरी इस रेटिंग को इस तकरीबन 200 पन्नों की किताब में शामिल ग़ज़लों, नज़्मों और गीतों के चयन के तौर पर देखा जाना चाहिए। वसीम साहब की कई शानदार ग़ज़लें इस किताब का हिस्सा नहीं हैं।
किताब मैं जो तकरीबन 60 ग़ज़लें हैं उनमें से दर्जन भर को छोड़ दें तो बाकी कोई खास असर नहीं छोड़तीं। चुनिंदा अशआर और गीतों के माध्यम से पृष्ठों को भरने की कोशिश की गई है जो कि पढ़ने वाले का समय जाया ही करती हैं। बेहतर होता कि ये किताब संक्षिप्त रखी जाती और उनकी प्रतिनिधि रचनाओं का संकलन किया जाता।