गौरव सोलंकी नैतिकता के रूढ़ खाँचों में अपनी गाड़ी खींचते-धकेलते लहूलुहान समाज को बहुत अलग ढंग से विचलित करते हैं। और, यह करते हुए उसी समाज में अपने और अपने हमउम्र युवाओं के होने के अर्थ को पकडऩे के लिए भाषा में कुछ नई गलियाँ निकालते हैं जो रास्तों की तरह नहीं, पड़ावों की तरह काम करती हैं। इन्हीं गलियों में निम्न-मध्यवर्गीय शहरी भारत की उदासियों की खिड़कियाँ खुलती हैं जिनसे झाँकते हुए गौरव थोड़ा गुदगुदाते हुए हमें अपने साथ घुमाते रहते हैं। वे कल्पना की कुछ नई ऊँचाइयों तक किस्सागोई को ले जाते हैं, और अकसर सामाजिक अनुभव की उन कंदराओं में भी झाँकते हैं जहाँ मुद्रित हिन्दी की नैतिक गुत्थियाँ अपने लेखकों को कम ही जाने देती हैं।इस संग्रह में गौरव की छह कहानियाँ सम्मिलित हैं, लगभग हर कहा
There is an unbearable darkness that lives inside the heads of Gourav Solanki's protagonists. They live in a world where they are completely outside redemption. As they have seen too much evil in the world to ever truly be happy. The non-linear structure of the stories is just as engaging. The lack of certainty with which characters look at important moments in their lives, not sure anymore of their reality is the true fulcrum of his stories. That, the ambiguity and the neverending night is the reason I'd place some of his stories as the best short stories I've read. Especially 'Sudha kahaan hai' and 'Tumhare haathon me machhliyan kyun nahi hain' are worth a read. The titular story is good as well even though a little too inspired by Marquez. But the book is a journey that is certainly worth taking.
कहानियां बहुत ज़रूरी हैं, पता है क्यूं...??? क्योंकि समाज के जिस हिस्से को हम देख नहीं पाते या हमें दिखाया नहीं जाता, वो जानना भी ज़रूरी है... गौरव सोलंकी जी की किताब शायद उन हिस्सों से गुज़रती है, किरदार वही हैं जो हमने शायद अपनी ज़िन्दगी में हमेशा देखे होंगे, पर उन किरदारों का पूर्ण सत्य नहीं जानते होंगे...!!! चाहें फिर वो 'सुधा कहाँ है' में नीलम और मिनी का किरदार हो, या 'ब्लू फ़िल्म' में यादव का किरदार...!!! कभी तो किरदार के दिल के किसी हिस्से से प्यार हो जाता है, या कभी इतनी बू आती है, कि वहां से उठ जाने का मन करता है, ये मानना मुश्किल होता है, कि असल ज़िन्दगी में ऐसे भी लोग होते हैं...!!!
ख़ैर ये किताब बहुत प्यारी लिखी गयी है, जिस कहानी ने मुझे अंदर तक तोड़ दिया वो 'पतंग' थी, इस कहानी को पढ़ते में बहुत बार अश्क़ कोरों तक आ गए, हो सकता है किसी के ना भी आये हों, हर रिश्ते में एक अलग सच छुपा था, जो परतें दर परतें खुलता रहा, संध्या हर किसी की ज़िन्दगी में कहीं ना कहीं, किसी न किसी मोड़ पर टकराई होगी या टकराने वाली होगी, माँ का वर्णन लेखक द्वारा किया हुआ, दिल ले जाता है, पिताजी की बीमारी हो या वो भाई का पिटना, दोनों ही कष्टप्रद होते हैं, खैर मैं उस कहानी को वैसे शायद ना समझा पाऊं जैसा मैन महसूस किया था पड़ते वक़्त...!!!
और बात जब कहानी की चल ही रही है, तो उस कहानी का ज़िक्र ना करना बेमानी होगा, जिस शीर्षक से ये किताब हमारे बीच आयी...."ग्यारहवीं -A के लड़के" ये शीर्षक उस कक्षा से ज़्यादा उस उम्र की बात करता है, जिसमें शायद कोई पहले तो कोई कुछ समय बाद आता है, मुझे नहीं पता, कि वो जादूगर असल ज़िन्दगी में कैसा होता होगा, पर अमरजोत हो या शायना, वो किरदार ज़रूर होते होंगे, और ऐसे ही होते होंगे, बात अगर रानी की करी जाए, तो उसपर मरने वाले आज भी हर गली में, हर कक्षा में, उतने ही मिलेंगे....इस कहानी को पढ़ते वक़्त सब ऐसा लग रहा था, कि जब हम उस उम्र में थे, तो शायद हमारे आस पास भी ऐसा ही कुछ हो रहा था, शायद सम्पूर्ण ऐसा नहीं पर अधूरा तो ज़रूर, किस्से सुनकर लग रहा था, कि ये वो किस्से हैं जो शायद उस उम्र में, मेरे कानों में फुसफुसाके गया था कोई, पर मैंने उतना गौर ना किया, किन्तु फ़िर भी ये कहानी मुझे उन किस्सों को याद दिलाने में सफल रही...!! मैं कहता हूँ ये किताब, एक बार ज़रूर पढ़नी चाहिए, पता है क्यों....एक नज़रिए के लिए,कुछ अलग जानने के लिए, और इन सबसे ऊपर, कहानी का श्रेष्ठ रूप देखने के लिए, कि जब किरादर ऐसा लगे कि वो तुम्हारे पास बैठकर, तुम्हें अपने किस्से सुना रहा हो, इससे ये और भी मज़ेदार हो जाती है...!! एक उम्दा किताब, एक विचलित करने वाला, किन्तु यथार्थ लेखन...!!!
११ ए: के लड़के में वो सब कुछ है जिसपे बात करने पर अमूमन समाज डरता है मै तहे दिल से शुक्रिया अदा करना चाहूंगा गौरव सर का जिन्होंने समाज की नब्ज टटोली और लिखा,इस किताब को पढ़ते पढ़ते मै अपने अतीत में चला जाता हूं ऐसा लगता है जैसे सब कुछ आंखों के सामने चल रहा हो । अन्तिम भाग तो एकदम सिरहन पैदा कर देता है कुछ को ये अश्लील लग सकता है पर अश्लीलता जैसा कुछ भी नहीं है इसमें कहानी में अंत तक डूब कर देखेंगे तो इसमें अलग सा रोमांच है एक अपनापन है साथ में अधूरापन भी लेकिन फिर भी इसमें साहित्य का एक तिलस्म है आभार सोलंकी साहब आपका
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Bhai kya that ye poor book padh li Esa lag raha tha bhai ajib ajib sapne dekhta hai aur subeh uth ke wahi sapne likh leta hai aur fir agle din usi spne ko dubara dekhne ki try marta hai . Kuchh line achhi thi bahut achhi.. Par har kahani aimless lagi.
"इस किताब की कहानियाँ वैसी हैं जो समझ तो सबको आ जाती हैं पर पूछो तो लोग बोलेंगे कि, यार कुछ समझ सी नहीं आई। इनमें मिलने वाले किशोर किरदार आपको अपनी गली, महौल्लों, चौराहों और छतों पर बुला कर ऐसी गहरी गहरी बातें बता देते हैं जिन्हें सुनने की कोई अपेक्षा नहीं करता। और फिर आप अचानक ऐसे मोहित से हो जायेंगे कि अपने आस पास की दुनियों को ध्यान से देखने लगेंगे - और खुद को भी। इसी कारण इस किताब का कोई भी पन्ना आपको परेशान कर सकता है। पर फिर भी आप पढ़ते ही जायेंगे क्योंकि तब तक गौरव सोलंकी की भाषा का तेवर आपको छू छू के चीर रहा होगा। मिसाल के तौर पे इस वाक्य को देखिये: "उसके मुस्कुराने में दूध का उबाल था।" अब थोड़ा सोचिये, कैसी है ये मुस्कान? और फिर सोचिये की कैसे कोई सोच पाता है, फिर लिख भी पता है, ऐसा कुछ? उम्दा कहानियाँ, ज़रूर पढ़िएगा।"
एक बिल्कुल नई भाषा। बहुत गजब का flow. और कहानी कहने का ढंग। हर कहानी इतने पड़ाव से गुजरती है की छोटी कहानी पढ़ने पर भी रहता है कि पूरा एक उपन्यास पढ़ डाला है। बहुत सुंदर। एक दबी हुई गुस्सा, एक दबी हुई उलझन, एक धुंध जो चारों तरफ है, इसके बीच तिरते हुए पात्र। हर पात्र अपने में अधूरा, मनुष्य। बहुत सुंदर।
This was a surprise package! i read it because someone pointed out the title story and wanted my opinon on the same.
That story was the only disappointment in the pack. haunting stories otherwise. lyrical writing and the ability to connect threads with each other. Tumhari bahon main machliya, is going to haunt me for days, I am sure.
Amazing book. It is highly recommended. Different stories reveal complexities arising from multiple layers of human psyche. Poetic language and surreal portrayal of characters depicts the unique storytelling style of the writer. Worth reading book.
After long time i read short stories in Hindi and it is a great experience and quiet enjoyable. Gaurav s writing style is very crispy and as well as poetic a. His stories are so griping and leaves impact even you close the book. Read this good work you Will enjoy.....
दिल कि ईमानदारी, दिमाग कि कम होशियारी मतलब ये किताब।
पहली बात गौरव भईया जिन्दाबाद, इस कहानी को डूबकर लिखा गया और सच कहूँ तो दिल उतारके पन्नो में पिरोया गया है। सब कुछ साफ साफ ईमानदारी से लिखना भी इस समय का आजादी तेवर बहुत कम लोगो को है।बिना मिर्च मसालों के कहानी के तरफ खींच लेना ,गजब कि विधा है आपकी।अब जितना भी कह दूँ राई ही होगा।
One of the most fascinating read. Hindi writers are scarce and Gaurav Solanki sits right at the top in the league of contemporary Hindi writers. His writing style, way of storytelling, deep characters, and all of these sewn together by a beautiful plot, which hits you hard and leave you thinking for long after finishing the story. Awesome work.