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विजयदान देथा की 5 सुपरहिट कहानियाँ

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सड़ता पानी पड़तल। नीर बहे सो निर्मल। अपनी-अपनी नजर और अपना-अपनानजरिया कि दया का दरिया, देव-पुरुष, दोस्त-दुश्मन को समान सुमति बख्शे कि किसी एक ठिकाने में गूजरों की एक खाती-पीती गवाड़ी थी। रेंडी नसल की गायें, भँवातड़े की भैंसें। पानी से भी ज्यादा दूध-दही की इफरात। घी के घड़े भरे हुए। बस्ती वालों को मनचाही छाछ की छूट। भरपूर नौजवान गूजर। ईसर की तरह तराशी हुई गोरी व मजबूत कद-काठी। टूल का बड़े छोगे वाला साफा। लाल किनारी वाली रेजी की धोती। मगजीदार अँगरखी, दुहरे पुट्ठे। गले में कंठी, ताँती और देवजी का फूल। खालिस सोने की साँकलियाँ। हाथों में चाँदी के नाहरमुखी कड़े, पैरों में कसीदे की सुरंगी जूतियाँ। साफे तक लंबी लाठी, ताँबे के तारों से गुँथी हुई। दोनों ओर चाँदी के बंध।

135 pages, Kindle Edition

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Vijaydan Detha

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