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Haadsa

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“जरुरी हैं?” उसने पुछा, “बीती बातों को कुरेदने से क्या लाभ? आप ही ने बताया, यह आत्महत्या नहीं हैं।” “मेरे कहने से पूर्व आपको इसका आभास था?” अनघाने हां भरते ही उसके नजरों में प्रश्न उठा। तब वह बोली, “वो बेडपर बिल्कुल सीधा सोया था। जैसे हम सोये हुवे बालक को हाथों पर उठाकर बिस्तर पर सुलाते हैं। अगर सर पर गोली दाग दी तो शरीर तेढ़ा होना चाहिए था। पिस्तौल हाथ से गिरी थी, वह भी ऐसे, जैसे किसीने हाथ के नीचे रखी हो। कोई चीज जब हाथ से छुटती हैं तब वह फर्ससे टकरा कर उछलती है, और फिर किसी भी दिशा में, कैसे भी गिरती हैं।” “और?” “भोजन की तैयारीयाँ। सजा हुवा डायनिंग टेबल,पकाया हुवा भोजन, स्पेशल कैंडल स्टँड, किसी खास मेहमान को बुलाकर कोई आत्महत्या कैसे करेगा?” हां वह खून ही है। लेकिन किसने किया और क्यो

185 pages, Kindle Edition

Published November 17, 2018

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Sanjay Kale

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