लोकेश दीपा से इन्तहाई प्यार करता था । लेकिन दीपा थी कि उसके लाख समझाने, मिन्नत करने के बाद भी कहीं और ही अटकी हुई थी । दीपा के लिये अपने जुनून, अपने दीवानेपन के तहत लोकेश ने एक घाती कदम तो उठा डाला, लेकिन फिर उसकी किस्मत जैसे घड़ी की सुइयों के साथ अटक गई और एक वाहिद दस मिनट का वक्फा उसके जी का जंजाल बन गया !
Surender Mohan Pathak, is an author of Hindi-language crime fiction with 314 books to his credit. His major characters are Crime reporter Sunil (unprecedented 123 Titles), Vimal (46 Titles) and Philosopher Detective Sudhir (23 titles). Apart from series, he has written 60+ Novels in thriller category.
शानदार कहानी के साथ-साथ शानदार climax. प्रेमसागर और लोकेश का किरदार बहुत पसंद आया. सब-इस्पेक्टर महेश्वरी का जवाब नहीं, लेकिन बीच-बीच में घड़ियाल और 10 मिनट वाला scene थोड़ा बोझिल-सा लगा.
इसमें कोई दो राय नहीं की इंसान अपनी सच्ची मोहब्बत को पाने की खातिर कुछ भी कर सकता है। या उसे किन्हीं दरिंदों से बचाने को खातिर खुद सूली पर लटक जाने को तैयार हो सकता है।
ऐसा ही कुछ हुआ एक आशिक के साथ जब उसे मालूम हुआ की उसकी माशूक जिस आदमी से मोहब्बत करती है, वह एक निहायत ही गिरा हुआ और वहशी इंसान है। जो लड़कियों को फंसाकर उसे बेच देने में अपनी काबिलियत समझता था। जो भोली लड़कियों को फ़साना अपना पेशा समझता था।
जब उस आशिक को इतने बड़े षड़यंत्र की खबर मिली तो उसने अपने प्यार को जिससे अभी तक उसने इज़हार भी नहीं किया था, को इस षड़यंत्र से बाहर निकालने की ठान ली।
पहले तो उसने उस लड़की को असलियत बयां की, लेकिन जब वह इस असलियत को नकार गयी तो, आशिक ने लिया उस वहशी को खत्म करने का फैसला।
एक शानदार मर्डर मिस्ट्री और समाज के अपराधों को नंगा करता हुआ एक बेहतरीन उपन्यास "दस मिनट"। इस उपन्यास के केवल तीन ही मुख्य किरदार है, जिनका ऊपर उल्लेख हुआ है। लेकिन बाकी में किरदारों ने इस उपन्यास की बेहतरीन पृष्ठभूमि रची है।
आप इस उपन्यास में मिलेंगे - "शक की सुई" - के बेहतरीन किरदार "दीवान कैलाशनाथ" से।
एक हाहाकारी थ्रिलर, जो पाठक साहब की सर्वोत्तम कृतियों में गिनी जाती है।