इंसान एक दिन अपनी धरती खुद ख़तम कर लेगा। उसका आविस्कार और उसकी नये खोज और उसके परमाडु हथियार जो उसके विनाश के गवाह बने गे। इंसान परमाडु हथियार बना कर समुद्र में टेस्ट करता है और न जाने कितने परमाडु हथियार सुमद्र में प्रथम और दुतिय युद्ध में डाल दिये इससे न जाने कितने मछलिया मर गये। इससे इंसानो को क्या लेना देना है। हम तो अपना विकास कर रहे है। जीव -जन्तु मरते तो मरते है। उससे अपना क्या जाता है। हमे अपने जीव -जन्तु तथा पेड़ पोधो से दोस्ती करना पड़े गा नहीं तो प्रकर्ति का प्रकोप सहने के लिए तैयार हो जाओ।