दवा और प्रसाद उतना ही लेना चाहिए जितना देने वाले देते हैं, अधिक लेने के लिए जबर्दस्ती नहीं की जाती। इश्क की खुराक इतना आतुर करती है कि लोग खुद पर नियंत्रण नहीं रख पाते और अपनी तबीयत की औकात से ज्यादा ले लेते हैं फिर पढ़ाई पर गाज गिर जाती है। कुल्हड़ भर इश्क : काशीश्क, प्यार की शीशी पर मार्कर से गोला करके खुराक बताने वाला है जिससे ये पता चलता रहे कि कितना इश्क जीना है और कितनी पढ़ाई करनी है।कुल्हड़-सा सौंधापन है काशी के इश्क में, कुल्हड़ भर कहने से आशय इश्क को संकुचित करने से नहीं बल्कि नियमित और संतुलित मात्रा में सेवन से है।
कोशलेन्द्र मिश्र का यह पहला लघु उपन्यास है जो काशी की मिठास भरी कहानी है,। कॉलेज की मस्ती ,दोस्ती प्यार, आदि का सुंदर मिश्रण है जिसमें रोली व सुबोध का प्यार, ज्योति प्रकाश ,अष्टावक्र व सुबोध की दोस्ती के किस्सो का मजेदार मिश्रण है बनारसी भाषा के लहजे में कहानी बहुत ही सुंदर और आकर्षित लगती है।
कहानी के हर पन्ने को पढ़ते हुए नए पन्ने की कहानी का इंतजार रहता है।
लेखक ने कहानी में काशी के सुंदर स्थान भी इंगित हैं । कहानी में रोली का साहसी और निडर पात्र ने मुझे बहुत प्रभावित किया।
ये बस एक किताब ही नहीं है इसमें पूरे काशी की एक झलक है। अगर आपका कोई भी रिश्ता काशी शहर से है तो ये किताब आपको जरूर पसंद आएगी। और काशी वालों के लिए लेखक की भाषा ऐसी है कि आपको लगेगा आप कुल्हड़ में चाय लिए किसी अपने दोस्त से बात कर रहे हैं। एक बात तो पक्की है आप किताब पढ़ने के बाद कौशलेंद्र सर की और किताबों के नाम जरूर गूगल करेंगे।
The way of writing is coherent and amusing. Book not only imparted us spendid story but also demonstrated scenary of Kashi, Characters of this novel has been connected very systematically which not only shows the inner meaning of the novel but also connect it with contemporary world. The language of this story is not abstruse to depict it. Story of it flows on throughout the book .
क़िताब में विश्वविद्यालय जीवन तो रेखांकित होता ही है , साथ ही बनारस का अल्हड़पन पाठक को रचना की अंतिम डोर तक बांधे रखता है । नाम भी रचना का उसी सोंधी ख़ुशबू को बयां करता है जिसे लेखक ने पाठकों के मध्य उकेरा है ।
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मैने सौ से ज्यादा प्रेम कहानियों को पढ़ा होगा लेकिन कुल्हड़ भर इश्क काशीश्क में जिस प्रकार लेखक ने लिखा है वह एकदम वास्तविक और दिल को छू जाता है और उसके साथ शुरू से अन्त तक जुड़े रहते हैं
हिसाब से लिखे गए शब्दों का उफान मारता इश्क है, जो खुशनुमा वातावरण का अहसास करवाता हैI कोई ऐसा मोड़ नहीं जहाँ जीवन ऐसा लगे की प्रेम छूट रहा और प्रेमी युगल आंसुओं की धारा में बहे जा रहे हैं। नमिला जुलाकर ठीक-ठाक इश्क की शृंखला में कुल्हड़ भर इश्क घुल जाता है।
बेहतरीन कृति !पढ़ाई और प्यार के सामंजस्य को दर्शाने का प्रयास
बहुत ही बेहतरीन रचना है इश्क और पढ़ाई के बीच सामंजस्य बिठाने का प्रयास कैसे एक युवा प्रेमी युगल करता है इसे जानना है तो कौशलेंद्र मिश्र का लिखित कुल्हड़ भर इश्क आपके लिए ही है।
लेखनी बड़ी ही साधारण है। नाम काशी पर आधारित होते हुए भी काशी कहानी में कुछ खास अहमियत नहीं रखता। इस कहानी की अच्छी बात यही है कि इस कहानी के पात्र, खास नायिका एक अलग और मजबूत किरदार है, परन्तु बाकि किरदार बड़े ही घिसे पिटे हैं, और उनकी भाषा भी बड़ी अभद्र है। उनका मजाक मामूली और बासी है।
अगर आप प्रेम कहानियाँ पढ़ना बहुत ही पसंद करते हैं, तो यह कहानी जरूर ही पढ़िए।
I have read this novel few days back..... Very nice and underrated novel. You will enjoy all the characters ,the bonding between the friends, college life, friendhip relationship love the raw language which is used is a centre of attraction in this novel. The female character is herself very entertaining. Overall a nice novel.
Book is good to start reading hindi literature. I really enjoyed reading this book. Reading philosophy and literature sometimes is boring. So these kinda books help a lot. Especially the character of Roli is amazing.
बनारस से जुड़ाव रखने वाले व्यक्ति को यह उपन्यास जरूर पढ़ना चाहिए,कहानी को बयां करने का तरीका बेहद "सजीव"और आकर्षक था। लेखक (कौशलेंद्र मिश्रा) को आभार एवम अभिनंदन🙏🙏💐💐