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मैं और वह: मै (1)

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इंसान पुरी दुनिया को जनता है पर वह खुद को नहीं समझ सकता है। इंसान अपने बारे में सोचता नहीं है। वह अपने भागम भाग में लगा रहता है। अपने लिए कभी समय नहीं निकाल पता है। इंसान मर जाता है। पर वह अपने वह के बारे में नहीं जान बता है। अपने वह के बारे में जाने के लिए हमें अपने आप को काबू में करना हो गा। उसे बहुत प्यार से समझना हो गा। आज कल का इंसान इतना काम का दबाव है की वह अपने आप से बात ही नहीं कर पता है। वह को जानने की लिए हम अपने आप पर काबू पाना हो गा। हमे शांत होना पड़े गा। अपने आप से सवाल करना पड़े गा। ये दुनिया के मोह -माया से दुर होना पड़े गा। वह को अपना दोस्त बनाना पड़े गा। अगर वह आप का दोस्त बन गया तो आप का जिन्दगी बदल जाये गा। अगर आप का वह दोस्त बन गया तो आप जिंदगी में कभी उदास नहीं हो गे। आप हर चीज जीत लो गे। और क

13 pages, Kindle Edition

Published December 31, 2018

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January 5, 2019
Good book.

This book introduce to I and he .the power of this book to know the who I am.to understand the power of spritualiy...
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