तेरहवीं शताब्दी ईस्वी में जब दिल्ली सल्तनत पर लड़ाका तुर्की कबीले शासन कर रहे थे, एक यतीम शहजादी का दिल्ली के तख्त पर काबिज हो जाना बहुत ही आश्चर्य जनक घटना थी किंतु सख्त इरादों की मलिका रजिया ने उस युग में ऐसा कर दिखाया। घोड़े पर बैठकर तलवार चलाने वाली सुन्दर औरत को तुर्की अमीर कभी भी दिल्ली के तख्त पर नहीं देखना चाहते थे किंतु दिल्ली की गरीब और निरीह जनता ने उसे दिल्ली की मल्लिका बनाया। यही कारण था कि तुर्की अमीर तब तक रजिया के दुश्मन बने रहे जब तक कि रजिया खत्म नहीं हो गई। यह पुस्तक रजिया के उन्हीं संघर्षों पर केन्द्रित है और रजिया का वास्तविक इतिहास है जो कि तेरहवीं शताब्दी के भारत के इतिहास की महत्वपूर्ण घटना है। सदियां आयेंगी और जायेंगी किंतु रजिया सुल्तान इतिहास में चमकीले तì