यश मजेजी के अमेज़न पर अन्य उपन्यास - वो मीरा नहीं थी (Woh Meera Nahin Thi by Yash Majeji) मंशा (Mansha by Yash Majeji) उपन्यास उम्र के बारे में - उपन्यास “उम्र” एक बेहद संवेदनशील उपन्यास है। इस उपन्यास का प्रत्येक पृष्ठ अपने आप में विचारणीय है और उम्र द्वारा जीवन में उत्पन्न परिस्थितियों के बारे में सोचने पर आपको मजबूर कर देगा। उपन्यास में एक 8 बरस के बच्चे के त्याग का वर्णन अपने आप में अनूठा है। कहानी बेहद नई और दिलचस्प है और आपको प्रारम्भ से अंत तक भावनात्मक बहाव में बहने को विवश कर देगी। उपन्यास उम्र में वर्णित कुछ अंश निम्न हैं - 1. अभिमन्यु के नेत्रों से याचना टपक रही थी और वह एक याचक की भाँति बैठा था, अपनी माँ की प्रशंसाओं का याचक। उसके हृदय में यह ही भाव थे कि देखो कैसा सुंदर चित्र है, इसके लिए मेरी माँ की प्रशंसा करो&#