"अपनी गली में अपना ही घर ढूँढ़ते हैं लोग . यह कौन है जो शहर का नक़्शा बदल गया?" :एक छोटे शहर से बड़े शहर बने और अब महानगर बनने की ओर अग्रसर एक बड़े शहर और उसकी एक बंद गली में रहने वाले परिवारों की सामाजिक ,पारिवारिक घटनाओं के तानों-बानों से बुने गए कथानक का नया मनोरंजक उपन्यास। वक्त का नश्तर बेरहमी से जिस शहर की हुलिया बदलने मे लगा है।