रवीन्द्रनाथ त्यागी को हिन्दी भाषा का ही नहीं, बल्कि समस्त भारतीय भाषाओं का इस सदी का सर्वाधिक समर्थ हास्य-व्यंग्य लेखक बनाती हैं। उनके कवि होने के कारण व उनके विस्तृत अध्ययन के फलस्वरूप उनके लेखन में जो एक विशिष्ट ‘बाँकापन’ आता है, वह उनका विशिष्ट आकर्षण है। हिन्दी व्यंग्य-लेखन की भविष्य की पीढ़ियाँ शायद यह विश्वास ही न कर पाएँ कि हिन्दी के इस महान व्यंग्यकार को उसके अपने जीवनकाल में मात्र एक ‘नफीस हास्यकार’ कहकर ही उपेक्षित किया जाता रहा है।
यशस्वी व्यंग्यकार और समर्थ कवि रवीन्द्रनाथ त्यागी का जन्म एक सितम्बर उन्नीस सौ इकत्तीस को उ.प्र. के बिजनौर जिले में स्थित नहटौर नाम कश्स्बे में हुआ। भयंकर गरीबी के कारण बचपन में उन्होंने मात्र संस्कृत ही पढ़ी और बाद में किसी तरह इलाहाबाद युनिवर्सिटी से एम.ए. की परीक्षा में सर्वप्रथम स्थान पाया। उसके बाद वे देश की सर्वोच्च सिविल सर्विसेजश् की प्रतियोगिता में बैठे और इंडियन डिफेंस एकाउंट्स सर्विस के लिए चुने गए। सन् उन्नीस सौ नवासी में वे कंट्रोलर ऑफ डिफेंस एकाउंट्स के पद से सेवा-निवृत्त हुए।
लिखने का शौक उन्हें बचपन से था। अब तक छह कविता-संग्रह, उन्नीस व्यंग्य-संग्रह और विशिष्ट रचनाओं के चार संकलन प्रकाशित। ‘उर्दू-हिन्दी हास्य-व्यंग्य’ नामक महत्वपूर्ण ग्रंथ का संपादन।
डॉ. कमलकिशोर गोयनका द्वारा संपादित ‘रवीन्द्रनाथ त्यागी: प्रतिनिधि रचनाएं’ नामक विशद ग्रंथ अलग से प्रकाशित।