रवींद्रनाथ त्यागी की गणना उन व्यंग्य लेखकों में होती है, जिन्होंने अपनी व्यंजनाओं से हिन्दी गद्य को एक नया आयाम प्रदान किया. 'शेष-अवशेष' में रवींद्रनाथ त्यागी के व्यंग्य और उनके विविध रचनाएँ सम्मिलित हैं. व्यंग्य रचनाओं में विषय वैविध्य और शिल्प की चुटीली युक्तियाँ हैं. जिन विषयों पर लिखा गया है, वे केवल ठिठोली का कारण नहीं हैं. प्रत्येक व्यंग्य किसी न किसी विसंगति के उद्घाटन में अपनी सार्थक परिणति पाता है. विविध रचनाओं में व्यक्तिचित्र, संस्मरण और यात्रावृत्त शामिल हैं. 'शेष - अवशेष' एक अर्थ में रवीन्द्रनाथ त्यागी के सुदीर्घ लेखकीय जीवन का सुफल है. उनकी अंतिम कृति होने के नाते यह विशेष रूप से संग्रहणीय है.
यशस्वी व्यंग्यकार और समर्थ कवि रवीन्द्रनाथ त्यागी का जन्म एक सितम्बर उन्नीस सौ इकत्तीस को उ.प्र. के बिजनौर जिले में स्थित नहटौर नाम कश्स्बे में हुआ। भयंकर गरीबी के कारण बचपन में उन्होंने मात्र संस्कृत ही पढ़ी और बाद में किसी तरह इलाहाबाद युनिवर्सिटी से एम.ए. की परीक्षा में सर्वप्रथम स्थान पाया। उसके बाद वे देश की सर्वोच्च सिविल सर्विसेजश् की प्रतियोगिता में बैठे और इंडियन डिफेंस एकाउंट्स सर्विस के लिए चुने गए। सन् उन्नीस सौ नवासी में वे कंट्रोलर ऑफ डिफेंस एकाउंट्स के पद से सेवा-निवृत्त हुए।
लिखने का शौक उन्हें बचपन से था। अब तक छह कविता-संग्रह, उन्नीस व्यंग्य-संग्रह और विशिष्ट रचनाओं के चार संकलन प्रकाशित। ‘उर्दू-हिन्दी हास्य-व्यंग्य’ नामक महत्वपूर्ण ग्रंथ का संपादन।
डॉ. कमलकिशोर गोयनका द्वारा संपादित ‘रवीन्द्रनाथ त्यागी: प्रतिनिधि रचनाएं’ नामक विशद ग्रंथ अलग से प्रकाशित।