पाठकगण, उम्र में तो नहीं, पर लेखन की दुनियां में मैं अभी अभी जवान हुआ हूँ। “वो आखिरी गोली” के बाद ये मेरी दूसरी रचना है। बचपन से जासूसी किताबें पढ़ने का शौक रहा है और उम्र के इस पड़ाव पर आ कर अब मैं अब मैं अपना लिखने का शौक पूरा कर रहा हूँ। मैं यहाँ किसी लेखक का नाम नहीं लूंगा, पर इतना अवश्य लिखूंगा कि मेरे पढ़ने के शौक की वजह से मुझे महान लेखकों की रचनाएँ पढ़ने का सौभाग्य मिला है। सभी मेरे प्रेरणा स्त्रोत रहे है। उन्हीं से सीख कर, प्रेरणा पा कर मैंने अपने पढ़ने के शौक को लेखन के शौक में परिवर्तित किया है। मैं जानता हूँ कि मेरी पहली रचना “वो आखिरी गोली” लेखन की नजर से कोई बहुत अच्छी रचना नहीं थी, मगर फिर भी मुझे आप लोगों का मेरी उम्मीद से कहीं ज्यादा प्यार और प्रोत्साहन मिला है। मुझे यकीन है कि मेरी इस ê