इकतालीस वर्षीय आई टी प्रोफेशनल की फाइव स्टार होटल के कमरे की बालकनी से गिरकर हुई मौत ने कई सवाल खड़े कर दिये थे। एक तो यहीं कि क्या ये खुदखुशी का एक सीधा-सादा केस था या फिर किसी साजिश के तहत किया गया क़त्ल? दूसरा ये कि एक वर्किंग डे पर ऑफिस की जगह उसकी होटल में मौजूदगी की वजह क्या थी? इन सवालों को हल करने सीआईडी ऑफिसर मकरंद राज उर्फ ‘मैक’ पूरी तरह से तत्पर था पर ये गुत्थी मुंबई मेडिकल कॉलेज की फोरेंसिक एक्सपर्ट डॉक्टर मैत्रेयी और उसकी कुशल टीम के बिना सुलझने वाली न थी।
यह एक पठनीय, तेज रफ्तार लघु उपन्यास है। शुरुआत से अंत तक यह पाठक को बाँध कर रखती है। अगर आपको प्रोसीजरल ड्रामा पसंद है तो यह कथानक आपको पसंद आयेगा। मुझे श्रृंखला की दूसरी किताबों का इन्तजार रहेगा। उम्मीद है उसमें मामले और ज्यादा जटिल और कथानक का कलेवर और वृद्ध होगा। मेरे विस्तृत विचार आप निम्न लिंक पर जाकर पढ़ सकते हैं: ड्राप डेड