सुमन केशरी की कविताएँ मौजूदा काव्य-परिदृश्य में अपनी विशिष्ट पहचान बनाती हैं। इनमें समकालीन दौर की बेचैनियाँ भी हैं और परम्परा का परीक्षण और पुनर्परीक्षण भी। ये कविताएँ यह एहसास कराती हैं कि याज्ञवल्क्य और गार्गी के बीच सम्बन्ध का व्याकरण बदल गया है। गार्गी अब मनचाहे सवाल कर सकती है और उसे याज्ञवल्क्य के उत्तर की दरकार भी नहीं।
हिन्दी में समकालीन कवयित्रियों की जो पीढ़ी पिछले पन्द्रह-बीस वर्षों से सक्रिय है और अपनी जगह बना चुकी है, सुमन केशरी उन्हीं की समवयस्क हैं। इस हिसाब से उनका पहला काव्य-संकलन देर से आ रहा है, हालाँकि कविताएँ वे काफ़ी पहले से लिख रही हैं। इस देरी की क्या वजह हो सकती है? शायद यह कि अभी भी भारतीय समाज में आम औरत पर परिवार और बच्चों के पालने के इतने दबाव हैं कि उसकी सर्जनात्मकता के पूर्ण प्रस्फुटन में अन्तराल आते रहते हैं। सम्भवतः यही कारण है कि अपनी एक कविता में सुमन केशरी यह कहती हैं—सृजन के बीहड़ों में मैंने क़दम रखा। कई साल बाद। रो...रोकर...। यह काव्य-पंक्ति सिर्फ़ एक कवयित्री का वक्तव्य-भर नहीं है, बल्कि इसके गहरे सामाजिक आशय हैं। भारतीय समाज में औरत के लिए घर के बाहर की सृजनात्मक दुनिया अभी भी एक बीहड़ प्रदेश है।
इस संग्रह की एक अन्य विशेषता इसमें हिन्दी कविता की कई स्मृतियों का मौजूद होना है। इनको पढ़ते हुए कभी निराला की ‘राम की शक्तिपूजा’ की याद आती है तो कभी विजयदेव नारायण साही की कविताएँ। आधुनिक हिन्दी काव्य-परम्परा का एक मिज़ाज भारतीय मिथकों को नए प्रसंग में जाँचने-परखने का भी रहा है। इस संग्रह में भी ऐसी कई कविताएँ हैं। पर ऐसी कविताएँ भी यहाँ हैं जो हमारे समकालीन अनुभवों का हिस्सा हैं, जैसे ‘सिपाही’, जिसमें अनाम से दिखनेवाले वर्दीधारी की ज़िन्दगी की वे परतें खुलती हैं जिनके बारे में हम अक्सर सजग नहीं होते। जिन्हें हम रोज़ गली-मुहल्ले, सड़क, बाज़ार या सीमा पर देखते हैं, मगर सिर्फ़ उनकी उपस्थिति के बारे में जानते हैं, उनके एहसासों से वाक़िफ़ नहीं होते। इसी तरह ‘बा और बापू’ कविता गांधी और कस्तूरबा के निजी सम्बन्धों को एक नई व्याप्ति देती है जहाँ एक ऐतिहासिक लड़ाई में शामिल हो व्यक्ति एक ऐसी विडम्बना में उलझकर रह जाते हैं जहाँ निजी दुखान्त को प्राप्त होता है।
one of the finest books of poetry... the language..the metaphors...the tone rhythm and tenor...everything about the book touches your heart...very poignant...very beautiful...a voice given to the hitherto voiceless.... a must read if you think of yourself as a poetry aficionado...
Brilliant work. I specially liked the poem 'Baa'...for those not familiar with the Indian history, Baa refers to Mahatma Gandhi's wife, Kasturba Gandhi. She was a formidable woman who held her own even in front of arguably the most famous man in the world at the time, and definitely someone looked up to as a God then and even today! In 'Baa', Suman Keshari presents her as her own woman and it is truly inspiring to read.
A definite must read book of poem. This is the first collection by the poet, making it even more remarkable.