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गालिब छुटी शराब

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"ग़ालिब छुटी शराब" वरिष्ठ साहित्यकार एवं लेखक रविन्द्र कालिया जी का संस्मरण है| जिसमे वे अपने जीवन की कहानी, कॉलेज के दिनों से लेकर तब तक की कहते हैं जब उन्हें डॉक्टर द्वारा शराब पीने के लिए मना कर दिया जाता है| इस बीच के कई किस्से, कई अनुभव और कई घटनाएं, जो उनके साथ घटी, उसे उन्होंने इस किताब में कलमबद्ध किया है|

290 pages, Hardcover

First published January 1, 2013

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About the author

हिंदी साहित्य में रवींद्र कालिया की ख्याति उपन्यासकार, कहानीकार और संस्मरण लेखक के अलावा एक ऐसे बेहतरीन संपादक के रूप में है, जो मृतप्राय: पत्रिकाओं में भी जान फूंक देते हैं. रवींद्र कालिया हिंदी के उन गिने-चुने संपादकों में से एक हैं, जिन्हें पाठकों की नब्ज़ और बाज़ार का खेल दोनों का पता है. 11 नवम्बर, 1939 को जालंधर में जन्मे रवीन्द्र कालिया हाल ही में भारतीय_ज्ञानपीठ के निदेशक पद से सेवानिवृत्त हुए हैं, उन्होंने ‘नया ज्ञानोदय’ के संपादन का दायित्व संभालते ही उसे हिंदी साहित्य की अनिवार्य पत्रिका बना दिया।

प्रकाशित कृतियाँ : कथा संग्रह- नौ साल छोटी पत्नी, गरीबी हटाओ, गली कूंचे, चकैया नीम, सत्ताइस साल की उमर तक, ज़रा सी रोशनी संस्मरण- स्मृतियों की जन्मपत्री, कामरेड मोनालिसा, सृजन के सहयात्री, गालिब छुटी शराब उपन्यास- खुदा सही सलामत है, ए.बी.सी.डी., 17 रानडे रोड व्यंग्य संग्रह- नींद क्यों रात भर नहीं आती, राग मिलावट माल कौंस कहानी संकलन- रवीन्द्र कालिया की कहानियाँ, दस प्रतिनिधि कहानियाँ, इक्कीस श्रेष्ठ कहानियाँ

पुरस्कार/सम्मान : उ.प्र. हिंदी संस्‍थान का प्रेमचंद स्‍मृति सम्‍मान, म.प्र. साहित्‍य अकादमी द्वारा पदुमलाल बक्‍शी सम्‍मान-2004, उ.प्र. हिंदी संस्‍थान द्वारा साहित्‍यभूषण सम्मान-2004, उ.प्र. हिंदी संस्‍थान द्वारा लोहिया सम्‍मान-2008, भारतीय ज्ञानपीठ में निदेशक।

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Displaying 1 - 3 of 3 reviews
70 reviews6 followers
September 1, 2021
Straight, honest, funny.

If one has any knowledge or care about hindi literature of 60s & 70s and lives & times of its writers, the book is almost unputdownable. Should be much more popular.
Profile Image for Ved Prakash.
189 reviews28 followers
March 4, 2018
स्वर्गीय रवीन्द्र कालिया जी का लिखा संस्मरण है। इस पुस्तक से 60s और 70s के नामचीन साहित्यकारों के जीवन में झांक सकते हैं आप। बहुत ही खूबसूरत ढंग से लिखी हुई पुस्तक है।
फक्कड़पन का जीवन जीते लोग, फर्श से अर्श तक पहुँचते लोग और शराब/नशा के कारण अकाल ही दुनिया से कूच करते कई साथियों का विवरण लिखा गया है।
Profile Image for vipul barodiya.
6 reviews
August 5, 2018
the compilation of experience in an author's life with all up and downs, loved the book.
Displaying 1 - 3 of 3 reviews

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