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अवनि-अंबर

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स्मिता सक्सेना saksena.smita@gmail.com अवनि--अंबर कहानियाँ ना तो पूरी तरह से सच होती हैं और ना ही पूरी तरह से झूठ। लेखक की कल्पना की उड़ान होती हैं ये कहानियाँ और इनमें वैसे ढ़ूँढ़ो तो अक्सर अपने आस-पास के लोग भी किरदारों से मिलते-जुलते से लगते हैं और कभी-कभी हम खुद भी किसी किरदार से इतना अपनापन सा महसूस करने लगते हैं कि कहानी के प्रवाह के साथ हम भी बहते हैं। उन किरदारों की भावनाओं को महसूस करने लगते हैं। कहानियाँ समाज का दर्पण होती हैं और बहुत बार ऐसा होता है कि हम कहानी के पात्रों से कहीं ना कहीं गहराई से जुड़ जाते हैं। प्रस्तुत प्रेम-कहानी भी कुछ ऐसी ही है जहाँ आप पात्रों के संग-संग स्वयं भी उनके मनोभावों को महसूस कर पाएंगे। समाज के नियम-कायदे, रीति रिवाज क्यों ऐसे हम इंसानों को जकड़ लेते हैं कि दो प्

41 pages, Kindle Edition

Published February 5, 2019

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