A contract killer who has no name. A dead man Gurang, a beautiful mistress Lily, mayor and inspector Chhetri. Is he framed for murder or he himself is killer? Anything is possible as he was a killer in past.
The book is fast paced but uneven. Many things are not explained or doesn't make sense.
‘यही कि यहाँ लाश में तब्दील हुआ ये शख्स मिलन गुरंग है जिससे मेरी कोई दुश्मनी नहीं’—मैंने जोर देकर कहा— ‘और इसीलिए मेरे पास कोई इसके क़त्ल की कोई वजह भी नहीं।’ ‘इस बाबत तहकीकात की जायेगी।’—वो बोला—‘मिस्टर छेत्री एक काबिल अफसिर हैं इसलिए मुझे यकीन है कि इस नुक्ते पर भी गौर करेंगे।’ ‘तो छेत्री साहब।’—मैंने पुलिसवाले की ओर मुड़ते हुए कहा—‘अपनी तहकीकात में इस खास नुक्ते पर भी गौर करना न भूलियेगा कि मरने वाला खुद को एक लोकल लीडर बताता था और खुले आम इस बात का दावा करता था कि वो आने वाले म्युनिसिपल इलेक्शनस में मेयर के पद के लिए अपनी दावेदारी रखने वाला था।’ दोरजी ने अभी तक अपना आगे बढ़ाया हुआ हाथ तत्काल पीछे किया। ‘क्या मतलब?'—वो सकपकाया। ‘मतलब ये कि इस शख्स—जिसका नाम मिलन गुरंग है—के मरने से मुझे कोई फायदा नहीं होने वाला’—मैंने उसकी दिशा में देखा और बोला—‘ये शख्स तुम्हारा पोलिटिकल राइवल था और निकट भविष्य में मेयर की सीट के लिए तुम्हें चेलेंज करने का ख्वाब देख रहा था।’ ‘हाँ तो?’—उसने हिचकिचाते हुए पूछा। ‘तो ये कि इस शख्स के मरने से ग़र किसी का कोई फायदा होने वाला है तो वो तुम हो दोरजी’—मैंने अपनी उंगली मानो उसकी छाती में घौंपी और बोला—‘इसके मरने का सबसे ज़्यादा फायदा तुम्हें ही हुआ है।’ ‘बेचारा, बढ़िया आदमी था।’—दोरजी, जो अभी तक हडबडाया हुया था, ने खुद को नियंत्रित किया, लाश में तब्दील गुरंग पर निगाह डाली, एक गहरी सांस ली और बोला—‘राजनीति में साफ सुथरी बातें करता था, क्लीन दी एक्ट, क्लीन दी सिस्टम के नारे दिया करता था। इसकी यूँ हुई इस असामयिक मौत से यहाँ के लोगों का एक बड़ा नुक्सान हुआ है।’ ‘डायलॉग बढ़िया है।’—मैं बोला—‘इसे, और इस जैसे कुछ और बढ़िया डायलॉग अपनी प्रेस रिलीज़ के लिए बचा कर रखो।’ तभी लिली उठकर बैठ गयी और रोने लगी।
विनोद छुट्टियां मनाने सिक्किम जाता है फिर वहीँ गुरुंग के क़त्ल में फंस जाता है औऱ यहीं से कहानी शानदार मोड़ लेती है. कंटेंट में वाक़ई दम है पर झिमरी के जेल जाने के बाद कहानी बहुत ही स्लो हो जाती है. कई जगह विनोद की बातें बोरिंग भी लगने लगती है लेकिन ऐसी बढ़िया थ्रीलर कम ही पढ़ने को मिलती है. Overall, its a entertaining book.