अज्ञेय हिन्दी के बहुआयामी, साथ ही विवादास्पद लेखक हैं। प्रेमचन्दोत्तर काल में गोदान के आदर्शोन्मुख यथार्थवाद के बाद मनोवैज्ञानिक यथार्थवाद का यह मॉडल इस दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण है कि इसकी प्रभावछाया में साहित्य का एक बड़ा भाग आता जा रहा है। द्वितीय विश्व युद्ध की छाया, भारतीय स्वाधीनता-संग्राम, साहित्य में पश्चिमी प्रभाव की छाया, किशोर से युवा के बीच के बीच के कालखंड, युवा मन के अन्तर्द्वन्द्व, अहंकार, विद्रोह और सेक्स के नकारने-स्वीकारने की मनःस्थितियाँ, प्रयोग, रूमानियत से लबरेज तरल लाक्षणिक विडम्बनात्मक व्यंजना में रसे-बसे हैं अज्ञेय के उपन्यास - शेखर एक जीवनी (दो भाग), नदी के द्वीप और अपने-अपने अजनबी।