एक महागाथा, सृष्टि के आरम्भ की। एक महागाथा, देवत्व के सृजन की। एक महागाथा, महानायक के अभ्युदय की। एक महागाथा, अतीत से वर्तमान की। अतीत जो हमारा था और वर्तमान जो हमारा है। क्या सम्बन्ध है दोनों का? मानवों की महात्वाकांक्षा से। त्रेता युग का महाज्ञानी, महापंडित और महातपस्वी जब वर्तमान में पुन: जन्म लेगा तो क्या होगा? उसकी इच्छायें, कलियुग की महात्वाकांक्षा तथा दृश्य और अदृश्य संसार की सभी शक्तियों में मची हलचल, ब्रह्माण्ड को या तो निगल जायेगी अथवा उसे बचाने आयेंगे त्रिदेव? उन्हें आना ही होगा; धर्म की स्थापना के लिए, अधर्म के विनाश के लिए। कर्म के बंधन को कौन तोड़ पाया है; क्या सती के प्रेम में शिव, धरा पर नहीं चले आये? क्या शक्र के प्रतिशोध ने उसे देवेन्द्र नहीं बना दिया? फिर, कुबेरनागा के प्र&
Narration is okay. Language & grammar are upto the mark. Plot is good. Writing is good & grippy.
A book for readers who are well versed in hindi & not for amateurs. I was disappointed with the paper quality. It makes reading process very difficult.
The story comprises of a mix of mythology, history, fiction & spirituality. It also highlights the essence of god & our beliefs on them - as per hindi mythology.
भारत की मैथोलॉजी देवो, असुरो के लेकर लिखी गई अधूरी कहानी औऱ शायद अधूरी ही रहेगी. लेखक ने 2019 की शुरुआत में किताब लॉन्च करी औऱ 3 साल से ज्यादा हो गए हैं, 2nd part का कोई अता-पता नहीं, सबसे ख़ास बात इसके 7 part हैं.
Writing style तो बहुत difficult हैं सिर्फ hardcore हिंदी fans ही पढ़ पाएंगे.
जब series complete करना औऱ टाइम पर लॉन्च करना बसकी नहीं हैं तो क्यों पहला part launch किया, हमारा पैसा औऱ समय क्या free हैं??