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दिल्ली सल्तनत का इतिहास: History of Delhi Sultanate

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इस ग्रंथ में ई.1206 से 1526 तक का भारत का इतिहास लिखा गया है। इस सम्पूर्ण काल में भारत पर तुर्क शासकों ने शासन किया। rqdks± dh jkt/kkuh fnYyh FkhA इसलिए तीन सौ साल की इस अवधि को भारत के इतिहास में दिल्ली सल्तनत कहा जाता है।
तीन सौ वर्ष की इस दीर्घ अवधि में भारत पर शासन करने वाले तुर्क किसी एक परिवार या वंश से सम्बन्धित नहीं थे। इनमें ई.1026 से 1290 तक शासन करने वाले शासकों को गुलाम वंश कहा जाता है क्योंकि इस शासन-वंश की स्थापना मुहम्मद गौरी के गुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक ने की थी। ऐबक के बाद इल्तुतमिश दिल्ली का सुल्तान बना जो कि ऐबक का गुलाम था। इल्तुतमिश के बाद इल्तुतमिश की पुत्री एवं पुत्रों ने अल्पकालीन शासन किया किंतु शीघ्र ही सल्तनत का अधिकार इल्तुतमिश के गुलाम बलबन के हाथों में चला गया। बलबन के बाद उसके दो वंशज क्रमशः सुल्तान बने।
ई.1290 में खिलजियों द्वारा उनका राज्य नष्ट कर दिया गया और दिल्ली में गुलाम वंश के स्थान पर खिलजी वंश की स्थापना हुई। खिलजी भी अधिक समय तक शासन नहीं कर सके। ई.1320 में तुगलकों ने उनका शासन नष्ट कर दिया।
तुगलकों ने ई.1320 से ई.1414 तक शासन किया किंतु ई.1414 में तुर्कों की सैयद शाखा ने तुगलकों का राज्य समाप्त कर दिया। सैयद ई.1414 से ई.1451 तक ही शासन कर सके, उन्हें लादियों ने नष्ट किया। लोदी ई.1451 से ई.1526 तक दिल्ली सल्तान पर अधिकार रख पाए। ई.1526 में समरकंद एवं फरगना से आए मंगोलों ने लोदियों का शासन नष्ट कर दिया। यहाँ से भारत के इतिहास में दिल्ली सल्तनत का युग समाप्त हो जाता है।
समरकंद एवं फरगना से आई मंगोलों की इस शाखा को भारत में मुगल कहा जाता है। वे भी वस्तुतः तुर्क ही थे किंतु तुर्कों की इस शाखा में मंगोलों के रक्त का मिश्रण था जिसके कारण वे मुगल कहलाते थे। दिल्ली का लाल किला वस्तुतः ई.1858 तक उनके अधिकार में रहा किंतु ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने उससे भी लगभग सौ साल पहले अर्थात् ई.1765 में मुगल बादशाह को पेंशन देकर शासन के काम से अलग कर दिया था। इसलिए सामान्यतः ई.1526 से ई.1765 तक का इतिहास, मुगलकाल कहलाता है।
दिल्ली सल्तनत का इतिहास (ई.1206-1526) तथा मुगलों का इतिहास (ई.1526-1765) मिलकर, मध्यकालीन भारत का इतिहास कहलाता है। इस पुस्तक में केवल दिल्ली सल्तनत का इतिहास लिखा गया है।

408 pages, Kindle Edition

Published December 29, 2018

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Mohanlal Gupta

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6 reviews
February 12, 2022
Nicely written

Very simple language different from other historian. Really nice to9 know the history of India since beginning. Excellent work by Dr Gupta
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