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हिन्दनामा [ Hindnama ]

हिन्दनामा एक महादेश की गाथा उसी तरह है जिस तरह प्रेमचन्द का गोदान भारतीय किसान जीवन की गाथा है। हिन्दनामा इतिहास है न काल्पनिक उपन्यास। यह एक धूल-भरा दर्पण है जिसमें हमारे देश की बहुत सी धूमिल और चमकदार छवियाँ दिखाई देती हैं। हिन्दनामा दरअसल हिन्दुस्तान के बारे में एक दीर्घ कविता है जिसमें कोई कालक्रम नहीं है। सब कुछ स्मृतियों की तरह गड्डमड्ड है, जहाँ प्राचीन और अर्वाचीन इस तरह मिलते हैं जैसे किसी नदी के घाट पर शेर और बकरी एक साथ अपनी प्यास बुझा रहे हों। इसकी कोई बिबलियोग्राफी नहीं है—यह कबीर के करघे पर बुनी हुई एक रंगीन चादर है, जो शताब्दियों से शताब्दियों तक तनी हुई है। उग्र राष्ट्रवाद के इस वैश्विक दौर में अपने राष्ट्र को जानने की कोशिश निश्चय ही जोखिम का काम है, और यह कहने की शायद कोई ज़रूरत नहीं कि हिन्दनामा हिन्दूनामा नहीं है। हिन्दुस्तान का इन्द्रधनुष जो सात रंगों से मिलकर बना है, उसकी ऐसी गाथा है जो कभी और कहीं भी खत्म नहीं होती—चलती ही जाती है। हिन्दी काव्य-जगत के लिए बरसों बाद हासिल एक उपलब्धि है हिन्दनामा। Quote - भारत एक खोया हुआ देश है सबको अपना-अपना भारत खोजना पड़ता है मैं भी इस भू-भाग पर भटकता हुआ अपना भारत खोज रहा हूँ ! हिन्दनामा को दस्ताने हिन्द कह सकते हैं या इसे कुल्लियाते हिन्द भी कहा जा सकता है । हिन्दनामा फ़ारसी के महाकवि फ़िरदौसी के अमर महाकाव्य शाहनामा से प्रेरित है ।

304 pages, Paperback

Published January 1, 2019

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Profile Image for Abhishek.
68 reviews1 follower
March 14, 2020
ये किताब नहीं है. इसे सितारों से तौला नहीं जा सकता. ये हमारा भविष्य है. हिन्दुस्तान का हिन्दुस्तान के लिए.
Profile Image for अभय  कुमार .
23 reviews5 followers
May 29, 2021
कृष्ण कल्पित जी की यह रचना इस महादेश के अतीत और वर्तमान के नग्न आलिंगन का अस्थिर जल में बना एक स्पष्ट प्रतिबिंब है।
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