एक तरफ है गामा नामक गुंडा, जिसके नाम से ही आम आदमी तो आम आदमी, छोटे-मोटे छुटभैये भी थर-थर काँपते हैं तो दूसरी तरफ है एसपी प्रद्युम्न जिसने बड़े शहर की आराम भरी ज़िंदगी को छोड़ कर इस पिछड़े जिले में अपना तबादला ले लिया है क्योंकि यही वह इलाका है जहां उसका बचपन गुजरा था । प्रद्युम्न गामा को अपने सपने के जिले को नर्क नहीं बनाने दे सकता और वह गामा को पकड़ने के लिए कृतसंकल्प है । चोर और पुलिस की इस आँख मिचौली का साक्षी है मोरवा जिला और विशेष रूप से सोमरौली थाना । लेकिन क्या यह कहानी बस इतनी भर है? शायद नहीं । वर्तमान समय की एक महत्वपूर्ण समस्या को आधार बना कर लिखी गई यह रचना सही अर्थों में चोर पुलिस की सामान्य कहानी है ही नहीं ।