चक्रधर पिछले 10 वर्षों से सेनापति था। और वीरप्पा पिछले 2 सालों से उस प्रतियोगिता को जीत रहा था। वीरप्पा चक्रधर से ईर्ष्या रखता था। वीरप्पा सेनानायक था और एक कुशल यौद्धा भी था। वीरप्पा को सेनापति पड़ चाहिए था। उधर चक्रधर अपनी देखरेख में राजकुमारी को निशानेबाजी और घुड़सवारी के गुर सीखा रहा था। चक्रधर ने राजकुमारी में साहस को कूट कूट कर भर दिया था।