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पराठे वाली भाभी

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वो आह की आवाज अभी कानो में खत्म ही नहीं हुई थी कि फोन बज उठा, देखा तो रवी का था, इगनोर किया, मगर दोबारा फिर से फोन आ गया। कांमक्रीडा में मोबाइल दखल दे रहा था... सोचा कि बंद कर दे मगर तीसरी बार फिर से... शायद कोई जरुरी काम ही होगा... वरना कोई लगातार क्यों फोन लगायेगा। रवी से बात की तो पता चला उसकी छोटी बहन की तबियत अचानक खराब हो गई और उसे हॉस्पीटल ले जाना है। रवी को राहुल की जरुरत थी जरुरी... राहुल मना नहीं कर पाया और अधूरा काम छोड़कर राहुल ने रवी के पास जाना जरुरी और उचित समझा। अनीता को समझाया कि ये काम तो हम बाद में भी कर सकते है लेकिन रवी की बहन को हॉस्पीटल ले जाने में लेट हुए तो कहीं कुछ अनहोनी न घट जाये। राहुल चला गया, अनीता भी चली गई, मगर असंतुष्टि की बेचेनी भरी आग उसकी बुझ नहीं पाई। ...

15 pages, Kindle Edition

Published November 3, 2019

3 people are currently reading

About the author

Rinkesh Bairagi

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