मुगलों को भारत से अपरा धन-सम्पदा प्राप्त हुई जिसका उपयोग उन्होंने अपनी शानो-शौकत के भव्य प्रदर्शन एवं भोग-विलास के साधन जुटाने में किया। इस प्रवृत्ति के चलते मुगलों ने भारत में अनेक विशाल एवं ऐतिहासिक भवन बनवाए। विदेशी इतिहासकारों के अनुसार मुगल शासन की स्थापना के साथ ही भारतीय वास्तुकला के इतिहास में एक नवीन युग की शुरुआत हुई। पश्चिमी लेखक पर्सी ब्राउन ने 'मुगलकाल को भारतीय वास्तुकला की ग्रीष्म ऋतु' माना है जो प्रकाश और ऊर्वरा शक्ति का प्रतीक होती है। मुगल काल में न केवल बादशाहों ने अपितु उनकी बेगमों, वजीरों, शहजादों, शहजादियों तथा अन्य लोगों ने भी बड़ी संख्या में छोटे-बड़े भवन बनाए थे जिनकी संख्या का पता लगाना संभव नहीं है। उनमें से बहुत से भवन एवं उद्यान अब काल के गाल में समा च