मोहनदास ने एक बार फिर से उसे देखा... चड्डी का उठाव अलग ही दिखाई दे रहा था, और ये देख कर मोहनदास की ताकत भी अपनी नसों को खींच रही थी। उसने उसे अपने करीब बुला लिया। फिर कंधे पर हाथ रखा और धीरे धीरे सरकाते हुए दुसरे कंधे पर जा कर रोका। इस स्पर्श से रामु के तनाव में दोगुना इजाफा हो गया। सिगरेट का धुआं छोड़ते हुए मोहनदास ने कहाः- जब कभी नींद नहीं आये तो मुझे बता दिया करना... अक्सर रातों को में भी जागता रहता हुं। उसकी बातों की महक से, और आवाज की वो हल्की गर्म हवा का कंधे और सीने पर छुवन से रामु के रोम रोम तक खड़े हो गये थे। खड़े हुए रोमों को देखकर मोहनदास ने नज़रें उठाई, और उसके पुरे बदन को अपनी आँखों में कैद कर लिया, फिर जुबान को बाहर लेकर उसी के साथ निचले होंठ को वो मुंह के अंदर ले गया। मोहनदास ने उंगलियों को उस&