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Bahut Door, Kitna Door Hota Hai । बहुत दूर, कितना दूर होता है

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एक संवाद लगातार बना रहता है अकेली यात्राओं में। मैंने हमेशा उन संवादों के पहले का या बाद का लिखा था... आज तक। ठीक उन संवादों को दर्ज करना हमेशा रह जाता था। इस बार जब यूरोप की लंबी यात्रा पर था तो सोचा, वो सारा कुछ दर्ज करूँगा जो असल में एक यात्री अपनी यात्रा में जीता है। जानकारी जैसा कुछ भी नहीं... कुछ अनुभव जैसा.. पर ठीक अनुभव भी नहीं। अपनी यात्रा पर बने रहने की एक काल्पनिक दुनिया। मानो आप पानी पर बने अपने प्रतिबिंब को देखकर ख़ुद के बारे में लिख रहे हों। वो ठीक मैं नहीं हूँ... उस प्रतिबिंब में पानी का बदलना, उसका खारा-मीठा होना, रंग, हवा, सघन, तरल, ख़ालीपन सब कुछ शामिल हैं। इस यात्रा-वृत्तांत को लिखने के बाद पता चला कि असल में मैं इस पूरी यात्रा में एक पहेली की तलाश में था...

128 pages, Kindle Edition

Published November 10, 2019

224 people are currently reading
1510 people want to read

About the author

Manav Kaul

32 books402 followers
कश्मीर के बारामूला में पैदा हुए मानव कौल, होशंगाबाद (म.प्र.) में परवरिश के रास्ते पिछले 20 सालों से मुंबई में फ़िल्मी दुनिया, अभिनय, नाट्य-निर्देशन और लेखन का अभिन्न हिस्सा बने हुए हैं। अपने हर नए नाटक से हिंदी रंगमंच की दुनिया को चौंकाने वाले मानव ने अपने ख़ास गद्य के लिए साहित्य-पाठकों के बीच भी उतनी ही विशेष जगह बनाई है। इनकी पिछली दोनों किताबें ‘ठीक तुम्हारे पीछे’ और ‘प्रेम कबूतर’ दैनिक जागरण नीलसन बेस्टसेलर में शामिल हो चुकी हैं।

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Community Reviews

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402 (45%)
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344 (38%)
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116 (13%)
2 stars
18 (2%)
1 star
8 (<1%)
Displaying 1 - 30 of 136 reviews
Profile Image for Seemita.
198 reviews1,779 followers
July 29, 2020
सुकून - एक सुकून सा मिला इस किताब के संग कुछ दिन बिताकर ; लगा जैसे एक दोस्त के साथ कहीं दूर चल दिए हों और एक खुला आसमान देख, नीचे चादर बिछा दी और बातचीत का पिटारा खोल दिया हो | सफर और उसके कई किस्से, यादें और उनके रंग, अजनबी और उनके कई सपनें, लड़कपन और भरी शरारतें, कसक और उसकी आहटें - इन सबको, बड़ी सहजता से मानव कॉल ने अपने यात्रा-वृत्तांत में लिखा है जो उन्होंने पेरिस के उन्माद सड़कों पर और स्विट्ज़रलैंड के मस्तमौला पहाड़ों के बीच अपने लेखन की खोज में जिया था | अपनी कहानियों के ताने बाने को उन्होंने कभी एक कॉफ़ी और क्रोसॉन के बगल में पाया तो कभी किसी वायलिन के तारों में खो दिया, कभी उसे किसी दोस्त के झुर्रियों में झिलमिलाते देखा तो कभी उसे एक आर्टिस्ट के चित्रों में बह जाते पाया | पर इन वादियों में उन्हें मिली सुबहें और शामें जिनकी छाया में खूबसूरत ख़याल खिले:
देखने के लिए हम बहुत ख़ूबसूरत और बड़ा आसमान देख सकते हैं। पर जीने के लिए… हम उतना ही आकाश जी पाएँगे… जितने आकाश को हमने, अपने घर की खिड़की में से जीना सीखा है।
यहाँ के बूढ़े लोगों को देखने में बहुत सुख है। उनका अपनी पहली कॉफ़ी पीना भी मुझे प्रेम लगता है। उनके पास बहुत वक़्त है। उन्हें कहीं जाना नहीं है। वह देर तक चिड़िया का अगल-बग़ल होना देखते रहते हैं। मुझे उनके भीतर चल रही हर हरकत बेहद पसंद आती है और अगर वह भीतर घट रही किसी बात पर मुस्कुराते हैं तो उनसे ख़ूबसूरत और कुछ नहीं होता। उनकी स्थिरता में एक नाटक है, कहानी है। वह अपने साथ अपना पूरा जीवन लिए कॉफ़ी पीते हैं।
यूँ तो मेरी उन लोगों से, जो दुनिया देखने की लालसा को दिल में लिए अकेले ही राहों के हो लेते हैं, कुछ ख़ास लगाव है, उनके लेखक होने पर वह कुछ ज़्यादा अपने से लगते हैं | शायद मेरे अंदर की अधूरी लेखिका इस बात को कहना चाहता थी , सो उसने कह दी | शायद इसीलिए इस वृत्तांत से मुझे लगाव भी व और थोड़ी ईर्ष्या भी |

पर यात्रा जब खत्म होने को आईऔर मानव उसकी टीस महसूस करने लगे, तो मेरा हाथ अपने आप उनकी ओर बढ़ा और आश्वासन में उनके कंधे को हलके से दबा दिया | वह इसलिए क्यूंकि एक यात्री ही यह बात दूसरे यात्री से कह सकता है की दूर और पास की सीमाओं से बहुत परे है यह सफर - जब आसमान से दोस्ती हो और हाथों में हो कलम, तो सभी यात्राएं यादें और सपनों में तब्दील हो जाती हैं और मेरा यह मानना है की दोनों ही बहुत देर तक आँखें बंद नहीं करती |


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Comfort – A sense of comfort dawned upon me while I read this book; as if I had embarked upon a journey with a friend and sighting a clear patch of sky, had spread open a sheet to sit and ventured onto a flurry of chitchat. Journey and its many stories, the many shades of memories, dreams of those strangers, the mischiefs of the childhood, longing and its rhythms - Manav Kaul has placed all this with disarming ease into his travelogue which he had penned roaming the inebriated streets of Paris and the majestic mountains of Basel in search of kernels for his writing project.

Although I harbor a bias for people who set themselves on roads with the sole intention of exploring the world, I find myself especially warm to them if they also turn out to be writers. I suppose the wannabe writer in my made this confession out of some vanity. No wonder then that this travelogue endeared me not without leaving me a tad envious as well.

However, when the end of the journey was nigh and Manav experienced saudade, I instinctively reached out to him in solidarity. Because only a traveller can reassure a fellow traveller that the journey is way beyond the trivial calculation of distances – when you befriend the skies with a pen in your hand, all journeys transform into memories and dreams, and I believe, both don’t call it quits soon.
Profile Image for Aradhana Dwivedi.
4 reviews2 followers
July 10, 2020
यात्रा वृत्तांत पढ़ने का शौक बचपन से ही रहा है मुझे और हाल के कुछ वर्षों में यूरोप से कुछ खास लगाव सा हो गया है। मैंने मानव की लिखी हुई किताब "बहुत दूर कितना दूर होता है" जब पहली बार देखी तभी पढ़ने का मन बना लिया था क्यूंकि ये यात्रा वृत्तांत था यूरोप के कुछ शहरों का। अमेजॉन और गुडरीड्स पे किताब की समीक्षा और रेटिंग देखकर किताब से काफी आशा थी।

कहानी कुछ यूं है कि मानव २ महीने के लिए यूरोप के दौरे पे निकलते हैं बेफिक्र होकर घूमने और खुद के साथ वक्त बिताने। अपनी इस यात्रा में वो लंदन तथा फ्रांस और स्विट्जरलैंड के कुछ शहरों में २/४ दिनों के लिए रुकते हैं।

मैं बहुत कोशिश करने के बाद भी मानव के साथ उनकी यात्रा पर नहीं चल पाई। पूरी यात्रा के दौरान मानव लालची लगते हैं, ज्यादा से ज्यादा लिख लेने के लालची । हर शहर में जाकर वो ना वहां की संस्कृति और रहन - सहन जानने की कोशिश करते हैं ना वहां के लोगों से बातचीत करने की और ना ही उस जगह की खूबसूरती को अपने अंदर भरने की। वो बस कैफे में बैठकर क्रोइस्संट (यूरोपीयन नाश्ता) और कॉफी के साथ अपनी कहानी लिखते हैं और बस अपनी कहानी में ही रहते हैं लगभग हर वक्त।

शहर देखने या घूमने वो सिर्फ तभी निकलते हैं जब उनकी कोई कहानी खत्म होती है और उन्हें नई कहानी लिखने से पहले दिमाग पहली से हटाना होता है या फिर जब कोई दूसरा उन्हें अपने साथ कहीं घूमने ले जाता है। मानव का मकसद यूं तो घूमना था मगर पूरी यात्रा के दौरान वो सिर्फ काम करते रहते हैं। वो विस्तार से बताते हैं कि कौन सी कहानी लिख रहे हैं उनके क्या किरदार हैं, कहानी कितनी ख़तम हुई और उन्होंने अब लिखकर अपने अमुक पब्लिशर को भेज दी है। मगर वो सिर्फ एक लाइन में लिख देते हैं कि उन्हें बुल्गारियन डिनर और मीठा परोसा गया या फिर की वो ये जगह देखने गए।

मानव वो जगहें एक्सप्लोर नहीं करते और ना ही हम जैसे पाठकों को अपनी आंखों से यूरोप दिखा पाते हैं। ये यात्रा उकता देने वाली है। ये एक यात्रा वृत्तांत से ज्यादा एक लेखक के मन के भीतर की यात्रा है। मानव ने खुलकर अपने विचार रखे हैं कि कब उनका लेखक मस्तिष्क क्या सोच रहा है। ये किताब आप मानव के विचारों के लिए पढ़ सकते हैं एक फिलोसोफिकल टच के साथ। अगर आप मानव और उनकी लेखनी के फैन हैं तो ये किताब आपको पसंद आयेगी लेकिन एक यात्रा वृत्तांत की तरह निराश करती है।
Profile Image for Arshie.
18 reviews4 followers
October 18, 2020
और फिर वही त्रासदी हुई कि हम भटके नहीं
Beautiful piece of writing. Makes you long to travel...makes you feel as if you are the one traveling through France. And touches the heart at all the right places. Especially when he talks about being alone, leaving places and the burden of freedom. He does not leave out or belittle the melancholic moments, instead accepts them and gives them time, so that they leave at their own pace, or rather become companionable. This book is satisfaction, longing, and bittersweet hope. It reminds me why I love to travel. Would re-read it, hopefully someday in France.
Profile Image for Arjit Anand.
31 reviews4 followers
April 22, 2022
ये किताब जीवन के हिस्से में एक पूरा जीवन समेटे हुए है, बहुत कम लोग इतनी ईमानदारी और खूबसूरती के साथ मन की सारी भावनाओं को कागज़ पे उतार पाते हैं। मानव कॉल बहुत ही कुशल लेखक हैं जिनसे मैं इस किताब के जरिए रू ब रू हुआ हूं। इनकी और भी रचनाएं अवश्य पढूंगा।
Profile Image for Girish Joshi.
136 reviews21 followers
August 5, 2024
सुंदर.

इस पुस्तक को पढ़ते समय मुझे कई बार ऐसा महसूस होता था कि मैं Paris में किसी कैफे में कॉफी और Croissant का आनंद ले रहा हूं। मुझे कैथरीन के लिए बुरा लगा। मुझे उम्मीद है कि उसे ज़िंदगी में प्यार मिलेगा। हम हमेशा जीवन से ज़्यादा चाहते हैं। काश, इस कहानी में Macrons भी होते।
Profile Image for Ritusaket Verma.
1 review2 followers
November 25, 2019
मानव कौल जी यात्रा वृतांत पढ़ा!"बहुत दूर, कितना दूर होता है"! एक सवाल जो हर व्यक्ति अपने आप से पूछता है-मुझे लगता है यह जो यात्राएं हम करते हैं हमारे रोजमर्रा के बर्ताव को बदल देती हैं, हमारा जो एक सेटअप हमने तैयार किया हुआ है अपने जीवन जीने के लिए उसे चुनौती देती है! कई बार हम मुस्कुराना चाहते हैं तो अपनी हंसी दबा देते हैं, कई बार निराश हो जाते हैं पर अपने आप को कॉन्फिडेंट दिखाते हैं, कभी-कभी बहुत डरे हुए अकेले तन्हा महसूस करते हैं, और कहीं एकांत में जाकर फूट-फूटकर रो लेते हैं... यह भावनाएं यदि हम अपने सेट एनवायरनमेंट में होंगे तो शायद कभी इस तरह से व्यक्त नहीं करेंगे ना ही महसूस करेंगे! हर यात्रा में एक नया एक्साइटमेंट, रोमांस, रोमांच, अस्थिरता, अज्ञात भय और एक अलग सी शांति! बहुत सारे आश्चर्यचकित कर देने वाले अनुभव और उन अनुभवों पर हमारे रिएक्शन। जोकि खुद ही हमें चकित कर देते हैं कई बार, कई बातों को लेकर हमारे इंस्टैंट रिएक्शंस हम खुद भी अपने आप से एक्सपेक्ट नहीं करते। मुझे यह यात्रा वृतांत पढ़कर अपनी यूरोप यात्रा याद आई.. और वाकई इस बात का एहसास हुआ"हम सब कितने एक जैसे हैं l बहुत निजी भी कतई निजी नहीं है"। मुझे इस यात्रा वृतांत के सहेयत्रियों से अपने बहुत से सहयात्री याद आए, एक चाइनीस टीचर जो 2 साल के डेपुटेशन पर पैरिस आई थी। Catacom के बाहर 3 घंटे की लाइन में जो हमारी बात चीत हुई और उनके साथ जो १३-१७ साल के टीनएजर्स थे जो ज्यादातर अमेरिका से आए हुए थे एजुकेशनल टूर पर और बहुत ही अचंभित थे योरोपीय आर्किटेक्चर , हिस्ट्री से! उन्होंने मुझसे कहा वे आएंगे इंडिया ताजमहल देखने! मैंने उन सबको नमस्ते करना सिखाया और उनकी टीचर ने मुझे "नी हो", "जईजियन"! ... अर्क दे त्रियोम स्टेशन के सामने मिला एक बांग्लादेशी भुट्टे और मूंगफली बेचने वाला जिसने मुझसे बात करते हुए एक भुनी मूंगफली का कोन पकड़ा दिया और जब मैं उसे यूरो देने लगी तो बोला यह मेरी तरफ से, और मुझे चेताया भी कि अपने पासपोर्ट का विशेष ख्याल रखना यहां बहुत से लोग इलीगली रहते हैं और इंडियंस के पासपोर्ट बहुत चोरी होते हैं। उसकी यूरोप तक की यात्रा भी काफी रोचक थी ! एक एनर्जी हीलर् जोकि हॉस्पाइस, intuitive reading, soul healing और भी न जाने क्या क्या जो कि मैं पहली बार सुन रही थी करता था, उसने कहा आपकी एनर्जी शानदार है! और भी बहुत से सहयात्री याद आए उनके मजेदार किस्से भी, इस यात्रा वृत्तांत को पढ़ते हुए मैंने अपनी यूरोप यात्रा भी दोबारा याद की और महसूस किया कितनी रोमांचक यात्रा रही मेरी 27 दिनों में 22 शहर शायद मैं कभी अपना यात्रा वृतांत लिखूं तो उसका नाम होगा "दौड़ा दौड़ा भागा भागा सा"! इस कहानी में बहुत से रोचक किस्से रोमांचक अनुभव और मजेदार पात्र है! संगरिया, साइडर, वाइन, बियर, बहुत स्वाद इटालियन क्रीम लिकर और कुछ सिगरेट के कश!
Profile Image for Manas Barpande.
101 reviews29 followers
November 20, 2019
"मैं बूढ़ा होना चाहता हूँ।"⁣⁣
⁣⁣
Writing this review a week after finishing the book because I wanted to spend some more time with these words, with this journey. I wasn't ready to share them with the world. I was in the trance that you get into after coming back to routine life from a long trip to mountains; the state where the line between the memories and the present is usually blurred.⁣⁣
. ⁣⁣
. ⁣⁣
"हर यात्रा ख़त्म होती है तो उसके छिले के निशान शरीर पर किसी टैटू की तरह सदा के लिए जम जाते हैं। किसी अकेले क्षण में उस टैटू को सहलाने में बहुत आनंद आता है।"⁣⁣
. ⁣⁣
. ⁣⁣
Reading this part-travelogue, part-fictional realism was a journey in itself; one which I would be taking time and again. I have never been what you call a wanderlust or globetrotter, but I travel a lot between the pages. And what I do look for is the tranquil among the chaos, the story among the metaphors. Written in what has now become trademark style of @manavkaul , this book didn't disappoint me a bit. In fact, it even made sure that I forgot about my search and became a part of its journey.⁣⁣
. ⁣⁣
. ⁣⁣
"यात्राएँ कतई आसान नहीं होती हैं। वे नोच लेती हैं - कितना कुछ भीतर से। हम कितना ख़ाली हो जाते हैं। बहुत सारी चीज़ें, जिनका महत्व हमारे जीते हुए इतना बढ़ जाता है की उसके बोझ तले हमारे कंधे झुकने लगते हैं,,,यहाँ यात्राओं में आते ही वे अपना महत्व एकदम से खो देती हैं। हम कंधे झटकते हैं और सारा व्यर्थ कचरा शरीर से झाड़ जाता है।"⁣⁣
. ⁣⁣
. ⁣⁣
Just like how a same trip affects travelers in different ways, this book will have varied effects on every reader. It might even remind you of Nirmal Verma's "Ve Din" or Kafka's pondering! And as they say, the things you like in a book tells more about you than the book itself. :)⁣⁣
. ⁣⁣
. ⁣⁣
"मैं अभी बहुत बच्चा हूँ। मुझे असल में बहुत सारी चीज़ें समझ में नहीं आती हैं। मैं जो भी कर रहा हूँ जीवन में, उसके ठोस कारण नहीं है मेरे पास। मैं अकेलेपन में अकेलापन तलाशता हूँ। दूर एक रौशनी दिखती है और मैं अपने अंधेरों को चीरता हुआ लगातार उस तरफ भागता रहता हूँ। मैं उस सबसे भागता हूँ जो थोड़ा भी बांधता है। मैं बहुत कमज़ोर हूँ। कायर हूँ।"⁣
. ⁣
. ⁣
In a nutshell, Manav makes us fall in love with his writing yet again. And as he said in the book, he for sure is doing 'something different'!
Profile Image for Kanika.
17 reviews2 followers
December 1, 2025
Mini Review:
It is a travelogue written by the author during his time in Europe.
His writing feels like sitting with him at a quiet café, sipping coffee and talking about life in general. The prose is raw and honest (something I genuinely appreciate in writing).
I also liked the respect that author has for art and the artists.

It’s one of those books that you don’t want to rush through (if you decide to pick it up, i.e.) because it’s worth lingering over.

I will share more thoughts in this review the next time I read it because I WILL read it again.

My rating: 4.5 stars/5 stars

Profile Image for Ajay Thakur.
5 reviews
June 4, 2020
बहुत सुंदर | बहुत ख़ूब। बहुत उम्दा।
इस यात्रा वृत्तान्त को पढ़ते हुए ऐसा लगता है जैसे आप सचमुच यूरोप की यात्रा कर रहे हैं। मानव अपनी भावनाओं को शब्दों में ऐसे पिरोतें हैं मानो सब कुछ आपके साथ घटित हो रहा हो।
मुझे मालूम नहीं था कि मानव इतने अच्छे लेखक हैं । मैंने लगभग पांच- छह बार मानव को अपने किराए के घर की बाल्कनी से नीचे सड़क पे टहलते हुए देखा है लेकिन कभी उनसे बात नहीं की। अगर मैंने ये किताब कुछ समय पहले पढ़ी होती तो मैं जब भी मैं मानव को अपने घर की बाल्कनी से नीचे सड़क पे टहलते हुए देखता तो मैंने ज़रूर उन्हें आवाज़ देकर रोकता और उन से मिलता और कहता कि " बहुत - बहुत धन्यवाद आपका मुझे यूरोप घुमाने के लिए" और अपने घर आने के लिए आग्रह करता और बीयर पीते हुए अपनी यूरोप यात्रा की यादें ताज़ा करते।
मुझे ऐसा लगता है के यह किताब सबको पढ़नी चाहिए।
Profile Image for A.
189 reviews
April 28, 2022
How do you rate a book which feels like a warm cup of coffee on a cold morning?

Was this a fiction or a real travelogue by Manav Kaul? Or was it a mirror he showed us to the feelings we don’t let come to surface? Or maybe it was a dream we often forget as soon as we wake up.

In 2019, Manav Kaul travels to Europe and writes this 160 pages long journey along with his emotions which feels as raw as it can be. From his inner turmoil to his dreams, from his past to his present; it’s a delight to read something so fresh

Some lines which stayed with me:

बहुत बड़े आकाश में भी हम अपने हिस्से का आकाश चुग लेते हैं
देखने के लिए हम बहुत ख़ूबसूरत और बड़ा आसमान देख सकते हैं।
पर जीने के लिए
हम उतना ही आकाश जी पाएँगे
जितने आकाश को हमने
अपने घर के खिड़की में से जीना सीखा है

हम सारा कुछ कहीं भी नहीं पा सकते हैं
अपनी लिखी कहानियों में भी नहीं।
कितनी सम्भावनाएँ अभी बची हैं कहानी में
अभी कहानी ख़त्म नहीं हुई है ।

कुछ तार कभी टूटते नहीं हैं। कितनी भी कोशिश क्यों न कर लें।
उन्हें लाख आश्वासन भी क्यों न दें कि अभी तोड़ रहे हैं, पर बाद में गाँठ बाँधकर फिर से जोड़ सकते हैं, पर वह मानते नहीं हैं।
Profile Image for Anshul.
93 reviews13 followers
January 15, 2026
एक तरह से एक ही यात्रा में दो यात्रायें चल रही हैं।
अपने यात्रा-वृत्तांत को पढ़ते हुए लगा की किस कदर एक कहानी की तरह सुनाई दे रहा है। बस इसमें कहानी लिखने की जोड़-तोड़ नहीं है। ये अपनी सारी खामी के साथ जैसा-का-तैसा है। मैं इसे कतई काटना-छांटना भी नहीं चाहता हूँ।
यात्राएं ऐसी ही होती है। कुछ दिन बहुत अच्छे जाते हैं और कई दिनों आपको पता नहीं चलता की आप असल मैं कर क्या रहे हैं?

Bahut Door, Kitna Door Hota Hai is a travelogue by Manav Kaul that speaks to me so personally, on such an intimate level ki shayad lagta hai mein unke saath hi safar par nikla hun. Must say I have yet to encounter a writer as deeply grounded as Manav Kaul.

शुक्रिया मानव कॉल अपनी यात्रा मैं सहयात्री बनाने के लिए.
Profile Image for Shishir Chaudhary.
255 reviews27 followers
January 13, 2025
This book 'Bahut Duur Kitna Duur Hota Hai' turned out to be akin to cold, foggy mornings of that autumn Europe vacation of yours or warm bonfire amid chilly winters of Bihar.
.
Absolutely stunning, and one of the best reads of the year for me. @manavkaul (whose fan I became after Kai Po Che) has written a travelogue on one of his solo trips to Europe, which is much more than a series of mentions of places and events - there is a strong element of what goes inside the mind of a traveller, how strangers become a corner of comfort, and when works of art become sources of inspiration to create something of one's own.
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I could relate to Manav's narration quite strongly, often appearing as if he has written the words right out of my thoughts. His fascination for museums (and eventually getting saturated), preference for travelling alone, act of rushing to explore cities within minutes of entering Airbnbs, strolling aimlessly, reading, getting awestruck by smaller towns. He travels like I do. Like many do. Like everyone should.
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This book is written in Hindi but in a form closer to our generation with a dollop of Hinglish/English words. Extremely satisfying, it has been a revelation to me; so much so that I immediately ordered four more books by him while reading the final pages.
Profile Image for Chaitanya Sethi.
429 reviews83 followers
April 28, 2025
यात्रा-वृत्तांत पढ़कर आनंद तो आया लेकिन मानव थोड़े Avoidant type फ़क-बॉए जैसे प्रतीत हुए ।

वर्ष 2019 में मानव ने फ़्रांस का भ्रमण किया था जिसे उन्होंने इस किताब में परिवर्तित कर दिया है। मुख्य तौर से उन्होंने अपने लेखन, पसंदीदा लेखक, कला, यात्रा, रहन-सहन, खान-पान इत्यादि का वर्णन किया है । एक समय था जब वह अपने गाँव के मित्रों के साथ बैठ कर यह सोचते थे कि न‌ जाने ये हवाई जहाज कहाँ जाया करता है, और अब उनके लिए एक जहाज की सैर एक आम बात हो गई है। क्या उनके भीतर वह गाँव का मानव अभी भी जीवित है?

एक‌ एकांँत-पसंदी व्यक्ति के विचारों को पढ़कर लगा कि शायद उनका इस दुनिया को देखने का तरीका अलग है। यात्रा में मानव जहाँ भी गए, एक बेचैनी लिए गए जिसे वह कभी छोड़ नहीं पाऐ । मुझे ऐसा लगा कि मानव अपने आसपास किसी को भी आने नहीं देते। उन्होंने कहा कि एक 'मुसाफ़िर' होने के नाते उन्हें कहीं भी रुकना नहीं भाता किंतु यात्रा में जब भी किसी ने उनको भीतर से जानना चाहा, उन्होंने अचानक अपना व्यवहार और शहर, दोनों ही बदल लिया!

उनके वृत्ताँत और विचार पढ़कर अच्छा लगा लेकिन उनके इर्द-गिर्द मित्रों के लिए थोड़ा दुख हुआ।
21 reviews
May 22, 2025
मानव कॉल का यह ट्रवेलोगे पढ़ कर मनो यु लगा की जीवन मैं कुछ जो खो गया था अचानक से मिल गया हो|
मानव की यूरोप की यात्रा मैं एक प्रकार की शांति की अनुभूति मिली ऐसा लगा मनो मैं खुद उनके साथ घूम रहा हु और नए पुराने लोगो से मिल रहा हु| मानव का हर बात को इतनी सच्चाई से लिखना मन को बहुत भा गया है| मुझे इस किताब से सुन्दर नए फूलों की खुश्बू आती है| इस किताब को पढ़ते वक़्त ऐसा लगा की मैं सर्दी की दुपहर मैं धुप मैं बैठ कर अपनी मम्मी के हाथ का खाना खा रहा हु| कुछ बातो पर मानव से बुरा भी मान लिया है मैंने जैसे की उन्हें कथरीने को कॉल ज़रूर करना चाहिए था पर ठीक है उनका भी कहना ठीक ही था| पढ़ते रहने मैं एक अलग ही शांति और मजा है| मुझे भी पेरिस जा कर कॉफ़ी पीते हुए Croissant का आनंद लेना है|

और हाँ मेरे मानाने मैं बहुत दूर सबसे करीब होता है
Profile Image for Mohit.
Author 2 books101 followers
July 3, 2020
Finished this book in a day and was left mesmerised. This book is a travelogue of author’s May-June 2019 trip to Europe but for all practical purposes, it was a journal of inward travel. There were so many instances when I had to rush for a pencil to just jot down my exact feeling while reading a particular paragraph. At times I took annotated pictures and posted on Twitter/Insta for quick reactions from people. This is one such book. Strongly recommended. Today.
Profile Image for Bookish Emotions.
119 reviews2 followers
October 23, 2024
It was a nice read. It took time to understand what's happening. There were things which I was able to relate too and there were things which I was not able to relate too at all. If you are a writer then you might be able to relate to all the dialogs where the author describes his writer side and thoughts.
You might develop a longing to be on a trip like the protagonist.
Profile Image for Aniket.
52 reviews3 followers
April 6, 2023
क्या खूबसूरत किताब थी यह!

पूरी तरह मन मंत्र- मुग्ध हो गया।

यह मेरी जिंदगी की पहली हिंदी किताब है जो मैंने, शुरुआत से अंत तक पढ़ी है। यह कहने में थोड़ी शर्म भी आ रही है, पर हिंदी का पढ़ाई से दसवीं क्लास के बाद पूरी तरह गायब हो जाने के कारण हिंदी किताबों और हिंदी अक्षरों से रिश्ता और दूर होता गया। इस दौरान कुछ सालों से काफी बार इन अक्षरों से वापिस जुड़ने की कोशिश की है। बहुत सी ऐसी किताबें खोली है, कुछ पन्ने पड़े हैं, फिर अपनी नासमझी से मायूस होके उसे वापस रख दिया है।

फिर कुछ ही दिनों पहले मुझे यह अहसास हुआ कि शायद जो भी किताब मैंने अब तक पढ़ने की कोशिश की है वह काफी पुरानी और शुद्ध हिंदी में लिखी गई है। पर आज कल की हिंदी महज पचास साल पहले की हिंदी से भी काफी अलग हो गई है। आजकल की हिंदी काफी ज्यादा सरल और पश्चिमी भाषाओं से प्रभावित हो चुकी है। तो अगर मुझे कोई हिंदी किताब शुरू से अंत तक एक प्रवाह में पढ़नी है, तो इसी नई हिंदी में लिखी किताब को तराशना होगा।

यह किताब वही खोज का एक खूबसूरत परिणाम है। यह किताब जब मैंने पहली बार खोली तो यह आशा कर रहा था की इसे उसी रफ्तार से पढ़ पाऊं जिस रफ्तार से मैं एक अंग्रेजी किताब पढ़ पाता हूं। और वही हुआ। कोई भी शब्द पर चाह कर भी रफ्तार कम नहीं हुई। हर शब्द, हर वाक्य बिना झिझक समाज आने लगी।

अब आतें इस किताब के असली रिव्यू पर। शायद यह चार सितारें जो आप ऊपर देख रहे है यह मेरे इस किताब को सफलता से पढ़ पाने की खुशी में है। पर एक तौर पे यह किताब सच में काफी सुंदर तरीके से रची गई है। शुरुआत में इस किताब का प्रवाह थोड़ा अटका अटका सा लगा, पर जैसे ही मेरा मनोबल बढ़ता गया, यह अटकाव दिखाना बंद हों गया।

मानव ने पूरी कोशिश की है की वह इस यात्रा - वृतांत को जबरदस्ती आकर्षित न बनाए। उनकी यात्राओं में महसूस की हुई बोरियत, अकेलापन, सुनसान दोपहरी और खाली रातें उसी तरह दर्ज करी गई है जैसे असल में घटी थी। और यही बात इस किताब की खूबसूरती है। क्योंकि जब वास्तविकता में यात्रा में ज्यादा कुछ नहीं हो रहा था, मानव के दिमाग में काफी चीज़ें घट रही थी। एक तरीके से मानव दो यात्राओं में प्रवास कर रहे थे।

इस किताब में मानव ने उन चंद किरदारों और उनके साथ बिताए दिनों को भी काफी खूबसूरती से परोसा है। जंग - हे, कैथरीन, ली वान, एलेक्स और मर्सिया के साथ गुजारे वो दिन काफी सरलता के साथ लिखी गई है।

पूरे किताब में सिर्फ एक ही चीज़ थी जो पूरे वक्त खटक रही थी, की यहा किताब को चैप्टरों में बाटा क्यू नही गया है। आजतक वही किताब ने दिमाग को स्थ्रीता दी है जिसमे चैप्टर दर चैप्टर एक किताब आगे पढ़ने का अहासह दिया है। पर शायद यह मानव का इस किताब की सरलता और यात्रा में काटी निजी जीवन से छेड़कानी न करने के प्रयास का नतीजा है।

पर अंत में इस किताब ने मेरे लिए हिंदी साहित्य का दरवाज़ा खोल दिया है। अब मुझे खुदपर इतना विश्वास तो आ ही गया है की आजकल के किताबें को तो में काफी आसानी से पढ़ ही लूंगा। हा अभी प्रेमचंद, जय शंकर प्रसाद और सूर्यकांत त्रिपाठी की किताबें पढ़ न पाऊं, पर यकीन है की वह दिन अब दूर नही।
250 reviews4 followers
May 25, 2022
Left for wanting more .

The book is a travel diary of the author and places he sees and the conversations he had with people of different countries . The book is exciting and intriguing one in sense it makes us motivated to travel and find our lost self. The author has beautifully described some experiences and conversations which seemed to me unadulterated.
Description of museums, coffee and croissant on every second page was repitive and boring at times. I was longing for more description of places and other beautiful and memorable spots of city apart from museums and cafes , may be sports grounds, architectural classics or city own cultural activities etc. At a conversation when the author says the Indians think Trump is a joker is amateurish, reason being we are such diverse and opinated in our views that we don't have a single line of thought for any person or place.
The book is overall a good read .
82 reviews7 followers
July 7, 2025
This was my first hindi travelogue. Did not have a lot of expectations and did not know who Manav Kaul was before my family pointed out his work in movies.

Coming to the book- It was selected as hindi book of the month in the blook club I am a member of (Read-A-Kitaab- a vibrant, happening and motivating book club). This talks about Manav's travel through London, France, Switzerland and Germany. The emotions are raw and naked. The journey is... like a journey. Cafes- Old friends- new acquaintances- memory of old love- people playing their characters in the story- they come when they should and they leave when it's time for them to leave.. an inquisitive bug in you would want to know what happened between Manav and someone in Korea.. Did he go back to his old village, his old friends?

There are thughts I could relate to quite easily. There are emotions I could feel and there is a journey that now I have taken with him as a slient spectator- hidden in the corner of a cafe, watching him order his coffee and crossaint and leaving for a quick smoke.
Profile Image for Saurabh Pandey.
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December 3, 2020
I have said it earlier also that Manav is my one of the favourite authors who ensures that you live those moments which he has mentioned in his book, it is like he just picks you up from you place and takes you with him to his world.
I believe every reader who sees this world in a different way will relate with the author in every manner. This is a book which should be in the collection of every bibliophile.
Profile Image for Priti Singh.
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April 11, 2021
मेरी पहली हिंदी किताब और पहली यात्रा वृत्तांत। पहले पढ़कर एक अजीब सी फीलिंग थी मानो की ये बोरिंग होने वाला है। कुछ समय के बाद जब थोड़ी स्थिरता आई तो पढ़ के बहुत अच्छा लगा मानो कि मैं भी Annecy में बर्फीले पहाड़ों में हूं। जो जैसा है वैसा ही लिखना यात्रा के खालीपन, मायूसी, थकान, अकेलेपन ये सब फीलिंग को भी दर्शाता है और वास्तविक भी बनाता है। सच में सहयात्री हूं ऐसा लगा :)
Profile Image for Damini Tiwari .
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November 27, 2022
मानव कौल ने अपनी इस किताब से बहुत सारी सीख दी है। ये उनकी यात्रा वृतांत के साथ साथ बहुत सी कश्मकश बहुत सी अधूरी बातें बहुत सा दर्द बहुत सा खुद में अधूरापन है। ये वृतांत जिंदगी और भी अच्छी तरह सीखा रहा है।
Profile Image for Diksha Mahajan.
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June 24, 2024
Completed my first Hindi novel, and to my surprise, I ended up connecting with and loving it so much! Its a beautiful travelogue that has made me want to pack my bags and go a trip ASAP.
Profile Image for Sachin Dhyani.
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June 27, 2025
मैं यात्रा में था मानव के साथ बहुत निजी मानों बहुत क़रीब से उनका बे वजह बेजल की गलियों में टहलना दिन की पहली काफी के साथ croissant खाता हुआ बगल की कुर्सी पर बैठे देख रहा हु। और दिन खत्म होने में आज क्या बीता कि बात में उनके मन के अंदर झाक रहा हु।

अकेलेपन में अकेले होने के नुकसान फायदा की जो नदी थी
उसमें कभी डूबता ओर कभी तिनके सा तैर सा जाता।

बहुत दूर कितनी दूर होता है। जिस दूरी की बात मानव कौल कहना चाह रहे है वह मैं पूरी तरह समझ सकता हु ।
खुद और खुद के लिखे की दूरी।
Profile Image for Arun Mishra.
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January 24, 2022
यात्रा करना और यात्राओं के बारे में पढ़ना मुझे अच्छा लगता है। एक मित्र के आग्रह पर मानव कौल रचित यात्रा वृतांत "बहुत दूर कितना दूर होता है" पढ़ना शुरू किया। मानव के कई कहानी संग्रह, एक उपन्यास और एक कविता संग्रह आ चुके हैं। बहुत से पाठक मित्र इनके मुरीद हैं और इनके लिखे हुए का खूब प्रचार प्रसार करते हैं। मानव स्वयं घुमंतू जीव हैं और यात्रायें इन्हें काफ़ी पसंद हैं। देश विदेश में घूमते रहते हैं। राइटिंग रेजीडेंसी लेकर ये कोरिया, अमेरिकी आदि देशों की यात्राएँ भी कर चुके हैं। इसी घुमंतू प्रवृत्ति के कारण वो यूरोप के कुछ शहरों की यात्रा पर निकल पड़ते हैं। इसी यात्रा का संस्मरण है ये किताब।

🌸संक्षेप में किताब की चर्चा :

कहानी की शूरुआत एक कैफे से होती है, मानव अपने बचपन के गांव और दोस्तों को याद करते हैं। एक पुराने अजीज़ मित्र को कॉल भी करते हैं और यहीं पर उनके जेहन में सवाल कौंधता है कि "बहुत दूर कितना दूर होता है" .. इसी का जवाब ढूंढते हुए वो अपनी आगे की यात्रा पर निकल पड़ते हैं। लंदन शहर से वो फ्रांस के एक छोटे से गांव Chamonix जाते हैं जहां से आल्प्स पर्वत श्रृंखला साफ़ दिखती है। यूरोप के छोटे गांव जहां सिवाय स्थानीय लोगों के बहुत कम सैलानी आते हैं घुप्प शांति और एकांत होता है। अंग्रेजी जानने और बोलने वाले भी दुर्लभ हैं, आपको अधिकांश समय खुद के साथ ही बिताना होता है। ऐसे में आप खुद के साथ रहना शुरू कर देते हैं और यकीन मानिये खुद के साथ रहना सच में काफ़ी मुश्किल होता है। कोरोना की वजह से हर जगह लगे लॉकडाउन ने हमें ये तो समझा ही दिया है। मानव इन छोटे गांवों में Airbnb के माध्यम से रहने की जगह खोजते हैं। उनकेे होस्ट भी एक से एक किरदार होते हैं। एक बूढ़ी औरत जो पुर्तगाली में बात करती है और समझती है कि हिंदुस्तानी ऐसे मंत्र पढ़ सकते हैं जिससे गृह शांति होगी :) । एक अन्य होस्ट मानव का अच्छा मित्र भी बन जाता है और दोनों कैंपिंग करने हाइक करके पहाड़ पर भी जाते हैं। अल्पस पर्वत का दृश्य भाव विभोर करने वाला है, आसपास की सुंदरता भी मन को प्रसन्न करती है। मानव हिंदुस्तानी खाना भी मिस करते हैं, हर सुबह वो कॉफी और क्रोइसें का नाश्ता करते हैं। यूरोपियन बीयर भी उन्हें पसंद आती है, आगे सफ़र करते हुए मानव जेनेवा (स्विट्जरलैंड) पहुंच जाते हैं जहां उन्हें अपने कोरिया राइटिंग रेजीडेंसी के दौरान की एक पुरानी दोस्त मिलती हैं। जेनेवा शहर में किसी तरह का आर्ट फेस्टिवल चल रहा है और मानव यहां बहुत से आर्ट गैलरी, म्यूजियम आदि जाते हैं। अपनी मित्र के साथ ही थियेटर, ओपेरा आदि भी देखते हैं। सम्भवतः सबसे ज्यादा घूमना इसी जगह पर होता है। सो, इस तरह ये करीब दो महीने तक चलने वाली यात्रा अपने आखिरी पड़ाव तक आ जाती है।

🌸विश्लेषण :

पूरी यात्रा में मानव कहानी लिखने और उन्हें अपने प्रकाशक को भेजने की चिंता में रहते हैं। कई बार वो अपना शेड्यूल और घूमना स्थगित करके सिर्फ़ लेखन पर फोकस करते हैं। यात्रा वृत्तांत में आपसे अपेक्षित है कि आप वहां के समाज, खानपान, रहन सहन, दृश्यों आदि की चर्चा करते हैं। खेद के साथ कहना होगा कि इस वृत्तांत में मुझे ये मिसिंग मिला।
काम के सिलसिले में मैं खुद पिछले आठ वर्षों से जर्मनी, डेनमार्क और नीदरलैंड में रह रहा हूं। जर्मनी में रहते हुए मैंने यूरोप के कई देशों की यात्रा भी की है और ये कह सकता हूं कि यहां लोगों ने अपनी सांस्कृतिक धरोहरों को काफ़ी सहेज कर रखा है। हर छोटे बड़े शहर, गांव आदि में अपने लोकल हीरोज के प्रति सम्मान और आदर की भावना है और उनके घर को संग्रहालय बना दिया गया है। इन बातों का ना के बराबर ज़िक्र है इस वृत्ता��त में।

लेखक ने नाश्ते में पूरी यात्रा में कॉफी और croissant खाये, ये उनका निजी चयन हो सकता है पर यूरोप में नाश्ते के और भी कई ऑप्शन उपल्ब्ध हैं। उदाहरण के तौर पर Baguette, तरह तरह के सैंडविच, सॉसेज, अंडे के आइटम, Panini और भी बहुत कुछ। कॉफी भी अलग अलग तरह की है, फ्रांस, इटली में जो कॉफी पीने का अंदाज़ है वो जर्मनी और स्विट्जरलैंड से जुदा है। इस विषय पर थोड़ा और खुल कर अपनी बात रखते तो मज़ा आता। स्विस डिनर करते समय उनको बल्गेरियन खाना और मीठा खाने का अवसर मिला, पर इसमें क्या और कैसा था, इसका कोई ज़िक्र नहीं है। मानव बीयर प्रेमी लगते हैं और क्यों ना हों, निजी अनुभव से मैं कह सकता हूं कि यहां यूरोप में बीयर की जितनी विविधता है कोई भी इसका मुरीद हो सकता है। पर उन्होंने अलग अलग शहरों में जाकर सिर्फ़ यही कहा की बीयर पी पर कौन सी, कैसी, कहां की, इसके संबंध में कुछ भी नहीं। यूरोपियन शहरों में बीयर rivalry भी है जहां एक शहर, प्रांत आदि के लोग अपनी अपनी बीयर को ही श्रेष्ठ मानते हैं।

कहीं भी घूमते हुए वहां के लोकल लोगों से बात करना, जानकारी इकट्ठा करने का सबसे अच्छा तरीका है, पर ऐसा लगा की मानव लोगों से बातचीत की भी बहुत कम कोशिश करते हैं। कई बार ये भाषा की वजह से हो सकता है और कई बार वो मेलजोल बढ़ाने के पक्षधर नहीं लगे। मुझे ये अच्छा लगा कि मानव के अंतर्मन में क्या चल रहा है वो बखूबी इसे दर्ज़ करते हैं और पाठकों के सामने भी बिना लाग लपेट के सामने लेकर आते हैं। मानव का दर्शन भी बेहतरीन है , हालांकि हमेशा की तरह इस बार भी मुझे उनके विचारों में निर्मल वर्मा के दर्शन की अमिट छाप दिखी। ये मानव का अपने प्रिय लेखक को दिया गया ट्रिब्यूट भी हो सकता है। भाषा के स्तर पर मानव का लेखन सशक्त है, उनकी भाषा मुझे सरल, रोचक और असरदार लगी। अगर आपको ये समझने की इच्छा है कि रचनाशील व्यक्ति कुछ लिखते हुए कैसी चीजों, विचारों आदि से गुजरता है तो आपको किताब अच्छी लगेगी। एक यात्रा वृत्तांत के तौर पर आपको उस तरह की संतुष्टि नहीं मिलेगी जो अच्छे वृत्तांत से अपेक्षित है। मैंने ये किताब अपने किंडल पर पढ़ी, आप इसे नजदीकी बुकशॉप या ई कॉमर्स वेबसाइट्स से मंगवा सकते हैं।
Profile Image for Aditya Sathe.
Author 3 books8 followers
November 20, 2020
Manav Kaul got me hooked to Hindi language

This is the first Hindi book I finished reading. Manav Kaul has managed to hook me up with Hindi ane has encouraged me to pick more Hindi books. This book has taken a very different and unique approach to travelogue writing. You will definitely love it if you are looking to experience the place instead of just read about touristy things..
Profile Image for Anchal Saksena.
Author 5 books9 followers
May 21, 2020
मानव कॉल की हर किताब पढ़ी है मैंने और उन्हें पढ़ कर एक अजीब सा अवसाद पैदा हो जाता है। अगर आप पहले से अवसाद में हो तो इन गंभीर किताबों से दूर रहें। मानव फिर भी मुझे उनकी किताबों की ओर खींच लेते हैं। वो चाहें कितना भी कह लें कि अकेले रहना उन्हें पसंद है पर मुझे लगता है अकेले के साथ वो अधूरे भी हैं और वो उस अधूरेपन से जूझते रहते हैं। शायद इसलिए यूं भटकते हैं। ये किताब यात्रा वृत्तान्त ज़रूर है पर इसके हर पन्ने के साथ यूरोप ही नहीं मानव के अधूरेपन की गहराइयों की भी सैर कर सकते हैं।
मैं कभी मानव से मिल सकी तो पूछूँगी "आप सचमुच अकेले हैं या असल में अधूरे हैं।।"
Profile Image for Srijan Singh.
14 reviews1 follower
November 27, 2020
किताब के पहले पन्ने पर मानव कौल के handwriting में लिखा है "आपका स्वागत, इस यात्रा में" ,
मेरा यकीन मानिए मानव कौल ने तहे दिल से इस यात्रा में आपका स्वागत किया है । उन्होंने आपको europe के खुछ सेहरो और गांव से तो हाथ पकड़ के मिलाया है पर सबसे अच्छी बात तो ये है कि कई सड़को पर तो उन्होंने आपको एकदम अकेला छोड़ दिया ताकि आप खुद भी europe की सैर कर सके। जाने कितनी मुलाकातें होंगी इन यात्रा पर जो आपको बरसो याद रहेंगे। Europe के यात्रा के साथ साथ आप एक और यात्रा करेंगे, मानव कौल और उनके लेखन की यात्रा , आप उस मानव कौल से मिलेंगे जो आपको अपने लेखन से बात करता हुआ उसमें डूबता हुआ दिखेगा।
पूरी शिद्दत से इस यात्रा का आनंद ले।
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